इस बीच 2009 में बांग्लादेश में होने वाले जूनियर एशिया कप के लिए जाने वाली इंडिया टीम में परमजीत का चयन हुआ था मगर किसी कारण यह टूर्नामेंट ही रद्द हो गया था। इस कारण वह एशिया कप नहीं खेल सके। खेलों के दौरान उनका हाथ टूट गय था। इस वजह से दो साल तक खेल से दूर रहना पड़ा। इसके बाद न तो सरकार ने परमजीत का साथ दिया और न ही किसी कंपनी या विभाग ने।
इसके बाद प्रतिभाशाली खिलाड़ी का हौसला टूट गया और एक समय ऐसा भी आया जब उन्होंने ड्रग्स लेना शुरू कर दिया। लेकिन धीरे-धीरे अपना घर चलाने के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत शुरू कर दी। वर्तमान समय में मेडल और प्रमाणपत्रों के ढेर के बावजूद परमजीत एक छोटे से किराये के मकान में रह रहे हैं।
परमजीत ने सरकार से बार-बार गुहार लगाई कि वे पिछड़े वर्ग से हैं और 12वीं कक्षा तक पढ़ाई भी की है। इसलिए वह नौकरी के हकदार हैं। सरकार उनकी मदद करे, भले ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में नौकरी दी जाए। वह अब भी अपनी प्रतिभा दिखा सकते हैं और साथ ही वह अपना और अपने परिवार के सपनों को पूरा कर सकते हैं।