चंडीगढ़। कैपिटल कॉम्प्लेक्स में अगले पांच साल होने वाले हर बड़े काम का खाका अब पहले ही तैयार किया जाएगा। यूनेस्को विश्व धरोहर में शामिल इस परिसर के लिए 2026 से 2031 तक का होलिस्टिक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। विभिन्न विभागों और भवनों के जिम्मेदार अधिकारियों से प्रस्तावित, स्वीकृत और विचाराधीन परियोजनाओं का ब्योरा मांगा गया है।
इसका मकसद अलग-अलग विभागों के निर्माण, मरम्मत और बदलाव के कामों को एक समन्वित योजना में लाना है। इससे विकास कार्यों के दौरान कैपिटल कॉम्प्लेक्स की वास्तुकला और विरासत पर असर पड़ने से रोका जा सकेगा।
हर भवन की देनी होगी अलग जानकारी
होलिस्टिक मास्टर प्लान- कैपिटल कॉम्प्लेक्स चंडीगढ़ के तहत स्टेकहोल्डर/ऑक्यूपेंट सर्वे तैयार किया गया है। यदि किसी विभाग के अधीन एक से अधिक भवन हैं तो हर भवन के लिए अलग जानकारी देनी होगी। जुटाई गई जानकारी के आधार पर डरोनाह (डेवलपमेंट एंड रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन फॉर नेचर, आर्ट्स एंड हेरिटेज) योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा।
14 श्रेणियों में मांगा काम का ब्योरा
सर्वे में इंटीरियर बदलाव, इंफ्रास्ट्रक्चर मरम्मत व रेट्रोफिटिंग, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, सीसीटीवी और सुरक्षा, साइनेज व वे-फाइंडिंग, फायर एंड लाइफ सेफ्टी तथा फर्नीचर व फिट-आउट की जानकारी मांगी गई है। इसके साथ बाहरी हिस्से व फैसेड, लैंडस्केपिंग व ओपन स्पेस, एचवीएसी/मैकेनिकल सिस्टम, पार्किंग, आईटी/नेटवर्किंग/केबलिंग, दिव्यांगजन के लिए रैंप व लिफ्ट और नई निर्माण या विस्तार परियोजनाओं का ब्योरा भी लिया जा रहा है।
हेरिटेज इम्पैक्ट पहले जांचेंगे
योजना में ऐसे कार्यों की पहचान पहले की जाएगी, जिनके लिए हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट जरूरी हो सकता है। जरूरत पड़ने पर एएसआई और यूनेस्को से परामर्श की प्रक्रिया भी अपनाई जाएगी। इससे कैपिटल कॉम्प्लेक्स में होने वाले विकास कार्यों और विरासत संरक्षण के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा सकेगा।