सोनीपत निवासी सुरेंद्र कुमार ने रोष जताते हुए बताया कि मृतक रोहतास उनके जीजा थे। वह 10 अगस्त को काम से खेत गए थे और अचानक बेहोश हो कर गिर गए। खेत में साथ गए लोग उन्हें उपचार के लिए डेढ़ घंटे के अंदर पीजीआईएमएस ले आए। यहां डॉक्टरों ने बताया कि रोहतास का आधा ब्रेन डेड हो गया है और पैरालाइज भी हो गया है।
डॉक्टरों ने संदेह जताया कि रोहतास ने कुछ जहरीली चीज खा ली है लेकिन किसी ने सांप के काटने की ओर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि रोहतास अकेला खेत में नहीं गया था। उसके जहर खाने का कोई मतलब नहीं था लेकिन इस बात को अनसुना कर दिया गया। 10 अगस्त को आपातकालीन विभाग से मरीज को तीन घंटे बाद वार्ड नौ में रेफर कर दिया गया।
वह बोल भी नहीं पा रहा था और मुंह से झाग आ रहा था। सांस लेने में समस्या के चलते रोहतास को एंबु से सांस दी जा रही थी। अस्पताल में आईसीयू तक उपलब्ध नहीं कराया गया। वार्ड में दर्द से तड़प रहे मरीज की सांस की नली निकल गई तो डॉक्टर को बताया गया। सुरेंद्र कुमार ने बताया कि यहां डॉक्टर ने जवाब दिया, जब नली निकली तो तुम क्या कर रहे थे।
जहर खाया है तो तकलीफ तो होगी ही, अब जो मुझे समझा रहे हो तो पहले मरीज को क्यों नहीं समझाया कि वह जहर क्यों खा रहा है। इसके बाद मरीज को ऑक्सीजन दी गई और उपचार जारी रखा। 12 अगस्त को रात 11 बजे डॉक्टरों ने रोहतास को डेड घोषित कर दिया। इसके बाद जब पोस्टमार्टम के लिए शव को ले गए तो पता चला कि रोहतास को सांप ने काटा था।
हैरानी की बात थी कि डॉक्टर तीन दिन में यह पहचान नहीं कर पाए कि सांप काटने और जहर खाने वाले मरीजों में क्या अंतर दिखाई देते हैं। डॉक्टरों की लापरवाही के चलते बहन का सुहाग उजड़ा और एक बेटी व दो बेटे के सिर से उनके बाप का साया भी उठ गया। मरीज को स्वयं देखने की बजाए डॉक्टर जांच करवाने में लगे रहे।
मामला संज्ञान में नहीं है और न ही किसी की कोई शिकायत मिली है। यदि शिकायत आती है तो इस मामले की जांच कराएंगे। - डॉ. रोहतास कंवर यादव, निदेशक, पीजीआईएमएस
एक्सपर्ट की मानें तो कोबरा सांप काटने के दौरान व्यक्ति के शरीर न्यूरोटाक्सीन रसायन छोड़ता है। इससे ब्रेन व नर्वस सिस्टम डेड हो जाता है। पीड़ित गफलत में जाता है और उसे धुंधला दिखाई देने लगता है। इसके साथ उसे सांस लेने में समस्या होने लगती है। जबकि दूसरे सांप वायपर किस्म के होते हैं, इनके काटने पर शरीर के विभिन्न हिस्सों से रक्त बहता है।
अक्सर सांप हाथ व पांव पर काटते हैं। कोबरा के काटने में सूजन आ जाती है। इसलिए डॉक्टर के लिए जरूरी होता है कि बरसात के मौसम में सांप के काटने को अनदेखा न करे। डॉक्टर के लिए जरूरी होता है कि मरीज यदि कुछ बता नहीं पा रहा तो उसके शरीर को देखा जाए और फिर उपचार शुरू किया जाए। हमारे देश में एएसवी की जरूरत 20 से 30 प्रतिशत को ही पड़ती है। सांप काटने वाले मरीज के शरीर पर दो दांतों के निशान होते हैं, इससे व मरीज के लक्षणों से बीमारी की पहचान की जाती है।