कोरोना वायरस ने चंडीगढ़ यूटी प्रशासन के अधिकारियों के काम करने के तरीकों को भी बदल कर रख दिया। पूरा साल यूटी प्रशासन का कैसे बीता, इस पर प्रशासन की ओर से एक किताब तैयार की गई है। 96 पृष्ठों की इस किताब में कर्फ्यू से लेकर वैक्सीन तक का सफर, तस्वीरों के माध्यम से बयां किया गया है। यूटी प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा ने किताब का विमोचन किया। इस मौके पर गृह सचिव अरुण कुमार गुप्ता, डीसी मनदीप सिंह बराड़ समेत अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
यह किताब एसडीएम (दक्षिण) सतीश कुमार जैन की निगरानी में उनकी टीम की ओर से तैयार की गई है। इस टीम में प्रोजेक्ट को-ऑर्डिनेटर विकास गोयल, एडिटर डॉ. निधि राणा के अलावा गौरव जिंदल, अमितेश कुमार, श्वेता चौहान, निशा बावा, सोमनाथ सहगल, अभिमन्यु, राजेश कुमार आदि का सहयोग रहा है। इस किताब में सबसे पहले वॉर रूम का जिक्र किया गया है।
लॉकडाउन के दौरान 30 सरकारी व 70 अन्य रसोइयों ने मिलकर करीब 62 लाख खाने के पैकेट तैयार किए, जिसे कर्मचारियों ने जरूरतमंदों में बांटा। लोगों तक रोजमर्रा का सामान पहुंचाने के लिए सीटीयू की बसों का सहारा लिया गया। शुरुआत के दिनों में बापूधाम में कोरोनावायरस के मामले बहुत तेजी से फैले, जिसकी वजह से शहर में आतंक का माहौल बन गया। यह वायरस मंडी में न फैले, इसकी वजह से मंडी को आईएसबीटी-17 में ले जाया गया।
इसके अलावा डोर-टु-डोर स्क्रीनिंग, मोबाइल टेस्टिंग, माइक्रो कंटेनमेंट जोन समेत प्रशासन के कई कार्यों के बारे में बताया गया है। लॉकडाउन का असर बच्चों पर भी काफी पड़ा। बताया गया कि उनके मानसिक तनाव को दूर करने के लिए एसडीएम (दक्षिण) की टीम की ओर से पतंगबाजी, पेंटिंग प्रतियोगिता, बाइक रैली, नुक्कड़ नाटक समेत कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
किताब में कोरोना वायरस के दिशा निर्देशों का पालन नहीं कर रहे लोगों के काटे गए चालान और मौके पर लोगों की ओर से किए जा रहे बहानों का भी जिक्र है। बताया गया है कि कैसे चंडीगढ़ धीरे-धीरे अनलॉक की तरफ बढ़ा। शहर को वैक्सीन की पहली खेप मिली और फिर टीकाकरण अभियान शुरू हुआ।