मनीमाजरा के देहरा साहिब मोहल्ले में रहने वाले नौवीं के छात्र ने घर में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बच्चा पढ़ाई में काफी कमजोर था और पीटीएम में यह बात उठने के डर से उसने यह कदम उठा लिया। हालांकि, पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, लेकिन प्रारंभिक जांच में मिले साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर पुलिस इस दृष्टिकोण से मामले की जांच कर रही है।
घटना शुक्रवार दोपहर साढ़े तीन बजे की है। 15 वर्षीय जिगर दरवाजे के ऊपर लगी लोहे की ग्रिल से कपड़ा बांधकर उससे लटका मिला। हालांकि, पुलिस पहुंचने से पहले ही परिजनों ने किशोर को फंदे से कपड़ा काट कर नीचे उतार लिया था। मनीमाजरा थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लेने के बाद शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। शव का पोस्टमार्टम शनिवार को करवा कर परिजनों के हवाले कर दिया जाएगा।
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आभूषण बनाने का काम करते हैं पिता
पुलिस जांच में सामने आया कि बबलू घोष का बेटा जिगर गवर्नमेंट मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पॉकेट नंबर वन मनीमाजरा में नौवीं कक्षा में पढ़ता था। बबलू घोष आभूषण बनाने के कारीगर हैं और एक दुकान में काम करते हैं। मृतक की मां कपड़े की एक दुकान में काम करती है। घटना के समय जिगर अपनी दादी अंजलि घोष के साथ घर पर था।
दोपहर करीब साढ़े तीन बजे उसके पिता खाना खाने घर आए तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। काफी खटखटाने के बाद जब दरवाजा नहीं खुला तो उन्होंने पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा और फंदा काटकर जिगर के शव को नीचे उतारा। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनका बेटा जिगर पिछले तीन दिनों से स्कूल नहीं जा रहा था, शुक्रवार और शनिवार को स्कूल में पेरेंट-टीचर मीटिंग थी। जांच में पता चला कि जिगर पढ़ाई में कमजोर था।
पढ़ाई में कमजोर था जिगर
पुलिस को आशंका है कि परिवार वालों को स्कूल जाना था और बच्चे को डर था कि टीचर उसके पढ़ाई में कमजोर होने की बात परिजनों को बताएंगे। संभवत: इसी डर के चलते शुक्रवार को उसने आत्महत्या करने जैसा कदम उठाया है। पुलिस अभी पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस ने मौके पर एफएसएल टीम को बुलाया गया था, जिसने पूरे घटनास्थल की जांच की है। पुलिस का कहना है कि मौके पर कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला है। पर सारे हालात और पूछताछ के बाद प्रतीत होता है कि जिगर ने पढ़ाई से परेशान होकर आत्महत्या की है। फिलहाल पुलिस धारा 174 सीआरपीसी के तहत कार्रवाई कर रही है।
बच्चों के सामने अभिभावक और शिक्षक को नहीं करनी चाहिए कमियों पर बातचीत
स्कूलों में बच्चों के सामने अभिभावक और शिक्षक को उनकी कमियों पर बातचीत नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा किसी अन्य के सामने भी बच्चे की कमी पर चर्चा से बचना चाहिए। क्योंकि इससे बच्चे में डर पैदा होने के साथ आत्मविश्वास में कमी आ जाती है। बच्चों के साथ खासकर वर्तमान शिक्षा प्रणाली के तनावपूर्ण माहौल में शिक्षक और अभिभावक दोनों को दोस्ती का माहौल होना चाहिए ताकि बच्चा अपने मन की बात खुलकर साझा कर सकें ताकि जिंदगी में फेल होने के डर को कम किया जा सकता है।
- प्रो. रोशन लाल, साइकोलॉजिस्ट, पीयू