चंडीगढ़। बिना ओटीपी शेयर किए खाते से 90 हजार रुपये निकलने के मामले में जिला उपभोक्ता आयोग ने एसबीआई (भारतीय स्टेट बैंक) को कोताही बरतने के आरोप में दोषी करार देते हुए आधे के बाद अब पूरी रकम लौटाने का आदेश दिया है। साथ ही शिकायतकर्ता को मानसिक प्रताड़ना के लिए 7 हजार और केस खर्च के तौर पर पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
सेक्टर-46 निवासी शिकायतकर्ता ईश्वर चंद्र ध्यानी ने जिला उपभोक्ता आयोग को दी शिकायत में बताया कि वह भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के क्रेडिट कार्ड होल्डर हैं। 26 नवंबर 2021 को उन्हें एक अज्ञात से नंबर से तीन बार फोन आया और करीब 17 मिनट तक शातिरों ने उन्हें बातों में उलझाए रखा। कॉल के दौरान ही एक मिनट के अंदर दो बार में 45-45 हजार रुपये (कुल 90 हजार रुपये) कटने का मैसेज आया। पैसे कटने के बाद एक और क्रेडिट कार्ड री-एक्टिव होने का मैसेज आया। इसके बाद साइबर धोखाधड़ी की शिकायत ऑनलाइन साइबर पुलिस समेत आरबीआई और एसबीआई को दी गई। शिकायतकर्ता के वकील डॉ. दीपक जिंदल ने बताया कि उनके मुवक्किल को एसबीआई के क्रेडिट कार्ड की राशि का भुगतान भी करना पड़ा।
साइबर धोखाधड़ी के बावजूद लंबे समय तक कोई कार्रवाई नहीं की गई। एक अप्रैल 2022 को भारतीय रिजर्व बैंक की ओर पैसे खाते में रिफंड करने की बात कही गई लेकिन एसबीआई बैंक की ओर से 45 हजार रुपये यानी आधी ही रकम ही लौटाई गई। जांच करने पर एसबीआई ने कहा कि शिकायत महज 45 हजार की है जबकि दूसरी शिकायत पहली शिकायत की नकल है। मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता अदालत ने एसबीआई को शिकायतकर्ता को बाकी के 45 हजार रुपये 9 प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाने के आदेश दिए।