-मंडियों में रैलियां और कार्यक्रमों की बुकिंग की तैयारियां शुरू
-मंडियों पर अब चढ़ेगा सियासी पारा, नजर आएंगे अलग-अलग झंडे और बैनर
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में गेहूं और सरसों का सीजन पूरा हो चुका है। खास बात ये है कि अब मंडियों में गेहूं और सरसों की आवक भी नहीं हो रही है और पहले से रखे अनाज का 90 प्रतिशत तक उठान हो चुका है। कुछ ही दिनों में अब प्रदेशभर की मंडियां राजनीतिक रंग में रंगने वाली हैं। मंडियों का मैदान और शेड खाली हो गए हैं। रैलियों के लिए सभी राजनीतिक दलों ने अपनी बुकिंग शुरू करा दी हैं। चुनावी गर्मी के बीच अब 25 मई तक मंडियों में सियासी रैलियां होंगी।
प्रदेश में में गेहूं और सरसों का सीजन लगभग समाप्त हो चुका है। इस बार मंडियों में 69 लाख मीट्रिक टन गेहूं की आवक हो सकी है। इसमें से 90 प्रतिशत करीब 63 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उठान भी हो चुका है। वहीं, सरसों की लिफ्टिंग करीब 87 फीसदी हो चुकी है। प्रदेश की मंडियों में 912479 एमटी सरसों का उठान किया जा चुका है। राज्य में सभी दलों के लिए मंडियों में रैलियां करना परंपरा भी रही है। एक तो पार्किंग की दिक्कत नहीं रहती, दूसरा मौसम आदि खराब होने पर शेड होने के चलते कार्यक्रम बाधित नहीं होता। इसके अलावा, छोटी रैलियां छोटे मोटे ग्राउंड हो जाती हैं, लेकिन जहां हजारों और लाखों की भीड़ जुटानी हो तो यह मंडियों में ही संभव है। क्योंकि चुनाव में अब मात्र 13 दिन शेष हैं, इसलिए सभी दलों के बड़े नेता हरियाणा में रैलियां करेंगे। भाजपा के लिए पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह के साथ-साथ राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय जेपी नड्डा समेत अन्य बड़े नेताओं की रैलियां होंगी। इसी प्रकार, कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैलियां होनी है। बड़े नेताओं के आगमन पर सभी दल पूरी ताकत के साथ बड़ी रैलियों पर जोर लगाएंगे।
इसलिए महत्वपूर्ण हैं मंडियों में रैलियां
अनाज मंडियों में रैलियों करने के पीछे एक बड़ा कारण भी है। क्योंकि मंडियों में व्यापारी वर्ग, मजदूर और किसान वर्ग सीधा जुड़ा है। हरियाणा में कहावत है कि प्रदेश की मंडियों में जिस भी दल का माहौल बना तो संबंधित शहर में उसका विधायक या सांसद बनना तय होता। दूसरा, बड़ा कारण ये भी मंडियों में लोगों की आवाजाही ज्यादा होती है। व्यापारी वर्ग जुड़ा होने के चलते शहर में भी एक माहौल बनता है। इसलिए तमाम दलों की रणनीति मंडियों के आढ़तियों, मजदूरों और किसानों का साधने की होती है।
जिला उठान (एमटी) प्रतिशत
अंबाला 224040 92
भिवानी 93057 74
चरखीदादरी 25462 81
फरीदाबाद 92331 96
फतेहाबाद 572139 85
गुरुग्राम 41738 91
हिसार 421059 86
झज्जर 161947 85
जींद 651995 89
कैथल 659561 98
करनाल 770567 99
कुरुक्षेत्र 535100 94
महेंद्रगढ़ 10521 84
मेवात 40656 97
पलवल 203090 96
पंचकूला 30761 82
पानीपत 258459 96
रेवाड़ी 25609 96
रोहतक 235697 81
सिरसा 696596 84
सोनीपत 350663 86
यमुनानगर 281181 96
कुल 6382240 90