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Chandigarh News: 90 फीसदी में अतिक्रमण, कई को नोटिस, सिर्फ चंद पर कार्रवाई

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चंडीगढ़। चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड (सीएचबी) के मकानों में वॉयलेशन पर नई जंग छिड़ गई है। सीएचबी के 90 फीसदी मकानों में या तो अवैध निर्माण है या तो अतिक्रमण। बेशक नोटिस कइयों को आए पर कार्रवाई सिर्फ चंद पर ही की गई। यही वजह है कि प्रशासन की कार्रवाई के बाद अब सीएचबी के करीब 60,000 अलॉटियों पर अवैध निर्माण और अतिक्रमण का संकट मंडरा रहा है। यह कारण भी है कि दिल्ली की तर्ज पर चंडीगढ़ में जल्द से जल्द ओटीएस लागू करने का मुद्दा गर्म हो चुका है। चंडीगढ़ में हाल में बोर्ड द्वारा सेक्टर-41 और सेक्टर-45 जैसे इलाकों में की गई तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद शहर में तनाव और विरोध प्रदर्शन बढ़ गए हैं। एक सर्वे के अनुसार चंडीगढ़ में हाउसिंग बोर्ड के 62,000 से 66,000 मकानों में से लगभग 90 फीसदी में किसी न किसी तरह का स्ट्रक्चरल वायलेशन या नीड बेस्ड चेंज (जरूरत के अनुसार बदलाव) पाया गया है।
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कई मकानों में यह हैं उल्लंघन

एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि कई मकानों में निर्माण मानकों की गंभीर अनदेखी की गई है। कई दीवारें इमारत का भार संभालने में सक्षम नहीं हैं और नींव की क्षमता से अधिक ऊपरी मंजिलों का निर्माण कर दिया गया है। कई घरों में बालकनी या छत से बाहर निकले हिस्सों पर कमरे और भारी दीवारें खड़ी कर दी गई हैं। इसके अलावा कई स्थानों पर मकान की निर्धारित सीमा से बाहर सीढ़ियां बना दी गईं और बाउंड्री वॉल को आगे बढ़ा दिया गया। बालकनी और बरामदों को ग्रिल या शीशे से पूरी तरह बंद कर कमरे का रूप दे दिया गया है। कई मकानों की छतों पर अवैध रूप से कमरे, टॉयलेट और लोहे की सीढ़ियां भी बनाई गई हैं। इतना ही नहीं, बिना अनुमति के लोड-बेयरिंग दीवारों में दरवाजे और खिड़कियां निकालकर संरचना को कमजोर किया गया है।
ओटीएस की मांग पर जनप्रतिनिधि एकजुट
इस मुद्दे के समाधान के लिए भाजपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए एक सर्वदलीय कमेटी का गठन किया गया है। यह कमेटी प्रशासन के साथ मिलकर स्थायी समाधान तलाशेगी। लंबे समय से लोग इन बदलावों को नियमित करने की मांग कर रहे हैं। प्रस्ताव है कि कंपाउंडिंग फीस (जुर्माना) लेकर इन निर्माणों को मंजूरी दी जाए, हालांकि इस पर अंतिम निर्णय अभी लंबित है।
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दिल्ली मॉडल पर नजर
दिल्ली सरकार ने 1,511 अनाधिकृत कॉलोनियों के लिए राहत योजना लागू की है। इसके तहत 2019 से 2023 तक के निर्माणों को जैसा है, जहां है के आधार पर स्वीकार किया गया है। शर्त यह है कि निर्माण सुरक्षा मानकों पर खरे उतरें। पहले जहां पूरी कॉलोनी का लेआउट प्लान पास होना अनिवार्य था, अब इस शर्त को हटा दिया गया है जिससे लोगों को बड़ी राहत मिली है।


कोट्स
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों में उल्लंघन कहें या फिर जरूरत के लिहाज से किया गया परिवर्तन, मकानों में कुछ न कुछ बदलाव तो किया गया ही है। अब मसला मकान तो तोड़ने से हल नहीं हो जाएगा। समाधान यह है कि नीड बेस्ड चेंज और ओटीएस को प्रमुखता दी जाए जिससे समस्या का निदान हो। -निर्मल दत्त, चेयरमैन, सीएचबी रेजीडेंट्स वेलफेयर फेडरेशन

कोट्स
दिल्ली में पुराने मकानों में जैसे स्कीम दी गई है उसी प्रकार से यहां बदलाव करने वालों के लिए स्कीम लाई जाए। प्रशासन को यह तय करना होगा कि कहीं ज्यादा खतरनाक वाॅयलेशन है तो उसको उसी मकान मालिक से कहकर हटवाए। जो जरूरी है उसके लिए स्कीम हो और यदि गड़बड़ है तो हल निकालें। -अजीत सिंह, कन्वीनर
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मकान बचाओ संघर्ष समिति
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