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Haryana News: 1254 की भर्ती के बाद भी स्वास्थ्य विभाग में पूरी नहीं हुई डॉक्टरों की कमी, 830 पद खाली

Thu, 11 May 2023 12:54 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

पीएचसी व सीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों में भी डॉक्टरों की कमी हैं। खासकर मेवात, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल, यमुनानगर, सिरसा और हिसार जिलों में अधिक पद खाली हैं। पिछली भर्ती में भी ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों ने इन स्टेशनों पर जाने से इंकार कर दिया था।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा स्वास्थ्य विभाग में पिछले साल में 1254 डॉक्टरों की भर्ती के बावजूद प्रदेश में 830 डॉक्टरों के पद खाली हैं। आलम ये है कि 1254 की भर्ती में चयनित होने के बावजूद मनपसंद स्टेशन न मिलने से 250 डॉक्टरों ने ड्यूटी ज्वाइन नहीं की। आखिरकार सरकार ने प्रतीक्षा सूची के अभ्यर्थियों को नियुक्ति का मौका दिया है। इसके अलावा, विभाग में पिछले 13 साल से डायरेक्ट एसएमओ (सीनियर मेडिकल ऑफिसर) के 153 पद खाली हैं। 

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इन पदों के मुकाबले कोई भर्ती नहीं की गई। इतना ही नहीं विभाग में पदोन्नति से भरे जाने वाले एसएमओ के 93 पद भी खाली हैं। सरकारी अस्पतालों में सबसे अधिक विशेषज्ञों की कमी है। इनमें गायनी, बाल रोग, हड्डी रोग, हृदय रोग समेत अन्य स्पेशलिस्टों की कमी है। विशेषज्ञों की कमी के पीछे का कारण निजी क्षेत्र के मुकाबले कम वेतन दिया जाना है। इसलिए अधिकतर विशेषज्ञ निजी अस्पतालों में जाना पसंद करते हैं। 

इसके अलावा, सीनियर डेंटल सर्जन और डेंटल सर्जन के 150 पद खाली पड़े हैं। कोरोना काल में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए अनुबंध पर भी डॉक्टर रखे गए थे। इसके बाद पिछले साल 1254 डॉक्टरों की भर्ती निकाली गई थी और दावा किया था कि इसके बाद अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी नहीं रहेगी लेकिन स्थिति आज भी नहीं बदली है।

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पीएचसी व सीएससी से लेकर जिला अस्पतालों में कमी
पीएचसी व सीएचसी से लेकर जिला अस्पतालों में भी डॉक्टरों की कमी हैं। खासकर मेवात, रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, नारनौल, यमुनानगर, सिरसा और हिसार जिलों में अधिक पद खाली हैं। पिछली भर्ती में भी ज्वाइन नहीं करने वाले डॉक्टरों ने इन स्टेशनों पर जाने से इंकार कर दिया था और मनपंसद के जीटी रोड और दिल्ली के नजदीक के स्टेशनों की मांग की थी।

इसलिए नहीं हो रही डायरेक्टर एसएमओ की भर्ती
विभाग में पहले डायरेक्ट तौर पर एसएमओ की भर्ती होती थी। एचसीएमएस (हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन) ने इसका विरोध जताया था और मांग की थी कि डायरेक्ट भर्ती के बजाय मेडिकल ऑफिसरों को पदोन्नत किया जाए। एचसीएमएस के पूर्व प्रधान डॉ. जसबीर परमार का कहना है कि वैसे मेडिकल ऑफिसर को एसएमओ बनने में 18 से 20 साल लगते हैं, अगर कोई सीधे एसएमओ लगता है तो वह सिविल सर्जन से लेकर विभाग में कुछ ही सालों में बड़े पदों पर पहुंच जाते हैं, जबकि उनसे सीनियर मेडिकल ऑफिसर ही रह जाते हैं। सरकार को चाहिए कि पदोन्नति के माध्यम से इन खाली पदों को भरा जाए।
 
खाली पदों को भरने के लिए प्रक्रिया जारी है। 1254 की भर्ती में प्रतीक्षा सूची वालों को नियुक्ति का अंतिम मौका दिया गया है। विशेषज्ञों की भर्ती के लिए भी तैयारी की जा रही है। -डॉ. सोनिया त्रिखा खुल्लर, महानिदेशक, स्वास्थ्य विभाग।
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