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सिटी ब्यूटीफुल में जल्द दौड़ेंगी 80 इलेक्ट्रिक बसें

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चंडीगढ़। केंद्र सरकार से 80 इलेक्ट्रिक बसों की मंजूरी मिलने के बाद चंडीगढ़ प्रशासन ने उन बसों को सड़क पर दौड़ाने के लिए प्रक्रिया को शुरूकर दी है। परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार 80 इलेक्ट्रिक बसों के लिए अगले हफ्ते टेंडर जारी कर दिया जाएगा।
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केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने 25 सितंबर को फास्टर एडॉप्शन एंड मैन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल यानी फेम इंडिया स्कीम फेस-2 के तहत चंडीगढ़ को 80 ई-बसें देने का एलान किया था। परिवहन विभाग के निदेशक उमा शंकर गुप्ता ने बताया कि इलेक्ट्रिक बसों के लिए प्रशासन द्वारा नए सिरे से टेंडर जारी किया जाएगा। इसके अलावा पुराना 40 ई-बसों के टेंडर को भी मंजूरी के लिए भेज दिया गया है। दरअसल, सरकार की योजना ‘फेम इंडिया’ के तहत साल 2022 तक देश को प्रदूषण मुक्त बनाने की है। इसके लिए सरकार ने फेम इंडिया स्कीम बनाई है। इसका मकसद ग्राहकों को सस्ते दामों पर हाइब्रिड व इलेक्ट्रिकल वाहन उपलब्ध कराना है। इसके तहत डीजल और पेट्रोल की जगह हाइब्रिड और इलेक्ट्रिकल दोपहिया वाहन, कार, तिपहिया वाहन और हल्के व भारी कमर्शियल वाहनों के लिए देशभर में इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। साथ ही इसका उत्पादन भी भारत में किया जाएगा। इसके अलावा इस योजना को सफल बनाने के लिए दोपहिया, तिपहिया वाहन और कार पर छूट भी देगी। इस स्कीम का दूसरा फेज अगले तीन सालों के लिए शुरू हुआ है।
अगस्त के आखिर में प्रशासन ने इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने के प्रस्ताव को टाला था
कोरोना वायरस से ट्रांसपोर्ट विभाग को काफी प्रभावित किया है, इसलिए प्रशासन ने अगस्त महीने में 40 इलेक्ट्रिक बसों को खरीदने के प्रस्ताव को टाल दिया था। फंड की कमी को देखते हुए यह फैसला लिया गया। सीटीयू के प्रस्ताव के तहत शहर में डीजल से चलने वाली बसों को हटाकर केवल इलेक्ट्रिक बसों को चलाना था। इस प्रस्ताव के पहले फेज में 40 इलेक्ट्रिक बसें खरीदनी थी। शहर में 40 इलेक्ट्रिक बसें चलाने के लिए चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट विभाग की तरफ से इस वर्ष से शुरुआत में टेंडर किया गया था। दो कंपनियों ने आवेदन भी किया। एक कंपनी ने 64 रुपये प्रति किमी तो दूसरे ने 67 रुपये प्रति किमी में बस चलाने के लिए प्रस्ताव दिया था। हालांकि सीटीयू को यह रेट पसंद नहीं आए, इसलिए दोबारा टेंडर करने का फैसला लिया गया लेकिन कोरोना वायरस के प्रकोप की वजह से इस टेंडर को नहीं लगाया गया और फिर अगस्त महीने के आखिर में वितिय संकट को देखते हुए प्रस्ताव को टाल दिया गया।
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