गणतंत्र दिवस के मौके पर पीजीआई के लिए एक अच्छी खबर आई। वित्त मंत्रालय के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी पीजीआई को सातवां वेतन आयोग की सिफारिशें लागू करने के आदेश दिए है।
नॉन फेकल्टी मेंबरों को इसका लाभ जल्द मिलेगा, जबकि फेकल्टी मेंबरों को थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है। क्योंकि इनके सैलरी स्केल सेंटर के मुताबिक नहीं हैं। इसलिए इसमें थोड़ा समय लग सकता है। दूसरी तरफ 30 प्रतिशत ग्रांट खुद से जुटाने वाली अड़चन भी खत्म हो गई है। ये अड़चन में पीजीआई लागू नहीं होगी। दरअसल पिछले हफ्ते वित्त मंत्रालय ने स्वायत्त निकायों (अटॉनमस बाडी) को पेय कमीशन लागू करने की नोटिफिकेशन जारी की थी। इस दौरान एक शर्त भी लगाई थी कि स्वायत्त निकायों को मिलने वाली ग्रांट की 30 प्रतिशत राशि खुद से जुटानी होगी। बाकी ग्रांट वित्त मंत्रालय की ओर से जारी की जाएगी। मौजूदा समय में 90 प्रतिशत राशि मंत्रालय की ओर से जारी की जाती है, जबकि 10 प्रतिशत राशि पीजीआई अपने सोर्श से जुटाता है।
आय का स्रोत पीजीआई में दुकानों का किराया और टेस्ट व मरीज के एडमिशन है। पीजीआई मरीजों के लिए समर्पित है। इसलिए वित्त मंत्रालय की शर्त इस पर लागू नहीं हुई। इस बारे में गणतंत्र दिवस के मौके पर पीजीआई के कार्यकारी डायरेक्टर प्रोफेसर केएलएन राव ने भी जानकारी दी।
सातवां वेतन आयोग आयोग लागू होने से पीजीआई के कर्मचारियों की सैलरी में 10-25 प्रतिशत का इजाफा हो जाएगा। बीते 24 जनवरी को स्टैडिंग फाइनेंस कमेटी (एसएफसी) की बैठक में पेय कमीशन के नोटिफिकेशन को रखा जाएगा और उस बैठक इसे लागू करने के निर्देश जारी किए गए। पीजीआई में आठ हजार से ज्यादा रेग्यूलर कर्मचारी है। इसमें प्रशासन के अधिकारी, फेकल्टी, कर्मचारी, सीनियर व जूनियर डाक्टर, टेक्नीशियन व अन्य शामिल हैं।