1992 में दो बेटों के साथ अमेरिका गई थी हरजीत कौर
हरजीत कौर 1992 में अपने दो बेटों के साथ अमेरिका गई थीं। वहां उनका शरण केस 2012 में खारिज हो गया था, लेकिन तब से वह नियमित रूप से हर छह महीने में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट के दफ्तर रिपोर्ट करती रहीं। उनके परिजनों ने बताया कि अधिकारियों ने उन्हें भरोसा दिया था कि दस्तावेज मिलने तक वह अमेरिका में रह सकती हैं।
कैलिफोर्निया में हुआ भारी विरोध
जब इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एन्फोर्समेंट ने हरजीत कौर को हिरासत में लिया तो कैलिफोर्निया में भारी विरोध हुआ। प्रदर्शनकारियों ने तख्तियां उठाकर हैंड्स ऑफ आवर ग्रैंडमा और ब्रिंग ग्रैंडमा होम के नारे लगाए। बावजूद हरजीत कौर को अवैध प्रवासी घोषित कर भारत डिपोर्ट कर दिया गया।
दो दशक तक स्टोर में किया काम
हरजीत कौर ने अमेरिका में एक भारतीय गारमेंट स्टोर में दो दशक से अधिक समय तक काम किया। उनके परिवार में दो पोते, तीन पोतियां और अन्य रिश्तेदार रहते हैं। परिवार का कहना है कि उनकी उम्र और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं (जैसे थायरॉयड, माइग्रेन, घुटनों का दर्द और तनाव) को देखते हुए हिरासत में रखना उनके जीवन के लिए खतरा था।