प्राचीनकाल से लेकर मुगलकाल तक सुनाम धातु की मूर्तियां, सिक्के और बर्तन बनाने का केंद्र रहा है। वहीं सात सौ साल पुरानी भगवान विष्णु की दुर्लभ मूर्ति यहां के प्राचीन सीतासर धाम की शोभा बढ़ा रही हैं। दिलचस्प पहलु यह है कि यह मूर्तियां यहां के प्राचीन सरोवर से कई दशक पहले मिली थीं। इसे पुरातत्व विभाग ने पंजीकृत करके राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा प्रदान किया था।
728 वर्ष पहले 1292 में भगवान विष्णु की इस मूर्ति को कई धातुओं को मिलाकर बनाया गया था। मूर्ति के पीछे फागुन 1 संवत 1349 विक्रमी अंकित किया हुआ है। हैरान करने वाला तथ्य यह है कि भगवान विष्णु के इसी आकृति व मुद्रा की सातवीं सदी की मूर्ति (जोकि पत्थर की बनी हुई है और स्थानीय मलकां वाला मोहल्ला के प्राचीन मंदिर में पड़ी है) के साथ मिलती-जुलती है।
आर्कियोलॉजिस्ट रामेश्वर जिंदल ने बताया कि पत्थर की इस मूर्ति से प्रेरणा लेकर धातु की मूर्ति सुनाम इलाके में ही बनाई गई होगी। धातू की मूर्ति में भगवान विष्णू, वैजयंती माला पहनाए दिखाए गए हैं। इसके अलावा जनेऊ, श्रीवस्ता और हाथों में गदा व सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं। बंद आंखें, चेहरे पर मुस्कान, मुकुट पहने और लंबे बाल दिखाए गए हैं। दाई ओर पुरुष और बाईं तरफ महिला कमल का फूल हाथ में लिए हुए है।