फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संगरूर: सुनाम में 700 साल पुरानी भगवान विष्णु की दुर्लभ मूर्ति बढ़ा रही सीतासर मंदिर की शोभा

Mon, 17 Feb 2020 12:31 PM IST
खुशबू गोयल सुशील कुमार, सुनाम ऊधम सिंह वाला(संगरूर)
विज्ञापन
भगवान विष्णु की मूर्ति - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
प्राचीनकाल से लेकर मुगलकाल तक सुनाम धातु की मूर्तियां, सिक्के और बर्तन बनाने का केंद्र रहा है। वहीं सात सौ साल पुरानी भगवान विष्णु की दुर्लभ मूर्ति यहां के प्राचीन सीतासर धाम की शोभा बढ़ा रही हैं। दिलचस्प पहलु यह है कि यह मूर्तियां यहां के प्राचीन सरोवर से कई दशक पहले मिली थीं। इसे पुरातत्व विभाग ने पंजीकृत करके राष्ट्रीय धरोहर का दर्जा प्रदान किया था।
विज्ञापन


728 वर्ष पहले 1292 में भगवान विष्णु की इस मूर्ति को कई धातुओं को मिलाकर बनाया गया था। मूर्ति के पीछे फागुन  1 संवत 1349 विक्रमी अंकित किया हुआ है। हैरान करने वाला तथ्य यह है कि भगवान विष्णु के इसी आकृति व मुद्रा की सातवीं सदी की मूर्ति (जोकि पत्थर की बनी हुई है और स्थानीय मलकां वाला मोहल्ला के प्राचीन मंदिर में पड़ी है) के साथ मिलती-जुलती है।

आर्कियोलॉजिस्ट रामेश्वर जिंदल ने बताया कि पत्थर की इस मूर्ति से प्रेरणा लेकर धातु की मूर्ति सुनाम इलाके में ही बनाई गई होगी। धातू की मूर्ति में भगवान विष्णू, वैजयंती माला पहनाए दिखाए गए हैं। इसके अलावा जनेऊ, श्रीवस्ता और हाथों में गदा व सुदर्शन चक्र धारण किए हुए हैं। बंद आंखें, चेहरे पर मुस्कान, मुकुट पहने और लंबे बाल दिखाए गए हैं। दाई ओर पुरुष और बाईं तरफ महिला कमल का फूल हाथ में लिए हुए है।
विज्ञापन
विज्ञापन

सुनाम में धातु की वस्तुएं बनाने का कारोबार प्राचीन समय से

चंडीगढ़ पंजाब यूनिवर्सिटी के आर्कियोलॉजिकल विभाग के मुखी रहे प्रोफेसर देवेंदर हांडा ने भी खोज की और अपनी पुस्तक ‘स्कल्पचर्स आफ पंजाब, आईकोनोग्राफी एंड स्टाइल’ में इसके देश की अनमोल धरोहर होना प्रमाणित किया है।

हांडा ने लिखा है कि सुनाम में धातु की वस्तुएं बनाने का कारोबार प्राचीन समय से था। हांडा ने लिखा है कि 1246 से 1265 तक मुगलकाल में नसिरूद्दीन महमूद सुनाम का गवर्नर रहा था। उस समय सुनाम स्टेट कैपिटल थी और उसी दौर में धातु की भगवान विष्णु की दुर्लभ मूर्ति बनी थी।    

इस वजह से बनाते थे छोटे आकार की मूर्तियां
जिंदल ने बताया कि विदेशी हमलावरों की ओर से हमला करने पर इसकी पूजा करने वाले लोग आसानी से अपने साथ सुरक्षित ले जाते थे। हालात ने श्रद्धालुओं को छोटे आकार की मूर्तियां बनाने के लिए मजबूर किया होगा। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें