जिस उम्र में महिलाएं घर में बैठकर आराम करतीं हैं और पोते-पोती खिलातीं हैं, उस उम्र में राजरानी नय्यर और विद्यावती सचदेवा अपने हौसले और जज्बे के दम पर एथलेटिक में अच्छे-अच्छों को चुनौती दे रहीं हैं।
सचदेवा ने रिटायर्डमेंट के बाद अपने को फिट रखने के लिए योग का सहारा लिया। इसके बाद फिट रहने की ऐसी सनक चढ़ी की वह जनून बन गई।
आज वह रेस सहित कई एथलेटिक इवेंट में मेडल जीतकर दूसरों के सामने मिसाल पेश की है।
सेक्टर-44 निवासी 76 वर्षीय राज रानी नय्यर और 72 वर्षीय विद्यावती सचदेवा का कहना है कि वेटरन स्पोर्ट्स में मेडल जीतने का सिलसिला शुरू हुआ तो आज भी जारी है।
विद्यावती सचदेवा ने बताया वह बीएसएनएल में जॉब करतीं थीं। लेकिन, 2002 में रिटायर्टमेंट के बाद फिट रखने के लिए योग का सहारा लिया। वहीं, राजरानी नय्यर हाउस वाइफ हैं।
सचदेवा की उपलब्धियां
15 दिसंबर 2013 को खेले गए वेटरन प्रतियोगिता में तीन कि लोमिटर वॉक में गोल्ड मेडल जीता। 17 दिसंबर को अमृतसर में खेले गए नार्थ जोन वेटरन टूर्नामेंट में विद्यावती सचदेवा ने 70 वर्ष आयु वर्ग में पांच गोल्ड मेडल जीतने में कामयाब रहीं। उन्होंने 100 मीटर, 200 मीटर, 800 मीटर और डिस्कस थ्रो में गोल्ड मेडल जीते।
हाउस वाइफ से खेले के मैदान तक
76 वर्षीय राज रानी नय्यर हाउस वाइफ हैं। परिवार के साथ साथ वह सामाजिक गतिविधियों और स्पोर्ट्स के जरिए अपने को व्यस्त रखतीं हैं।
उनके अनुसार, शरीर को निरोगी रखने के लिए काम करें और हमेशा अपने आप को व्यस्त रखें। मुझे औरों की तरह समय को खोना नहीं है, बल्कि उसे खुलकर जीना है।
उन्होंने अमृतसर में खेले गए नार्थ जोन वेटरन टूर्नामेंट 75 वर्ष आयु वर्ग में 100 मीटर, 200 मीटर, 800 मीटर और डिस्कस थ्रो में 4 गोल्ड मेडल जीते। वह अभी तक 20 से अधिक मेडल जीत चुकी हैं।
ये है दिनचर्या
राज रानी नय्यर और विद्यावती सचदेवा रोजाना सुबह और शाम 2 घंटें से अधिक सैर करती हैं। इसके साथ ही वह योगा करती हैं। यही नहीं इसी सेक्टर में योग क्लास में वह अन्य महिलाओं को योग के जरिए फिट रखने के टिप्स भी देती हैं।