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चिंताजनक : चंडीगढ़ में दस दिन में 601 संक्रमित लापता, किसी का पता गलत तो किसी का मोबाइल बंद

Fri, 21 May 2021 11:37 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

स्वास्थ्य विभाग से सूची मिलने के बाद भी कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम ऐसे लोगों को अब तक ढूंढ नहीं पाई है। ऐसे में ये लोग आसपास के लोगों के लिए घातक सिद्ध हो सकते हैं। 
 
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चंडीगढ़ में कोरोना - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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चंडीगढ़ से पिछले 10 दिनों में 601 कोरोना संक्रमित लापता हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के पास तो इनका आंकड़ा है, लेकिन कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम को इनकी कोई जानकारी नहीं है। इन मरीजों की ओर से जो पता दिया गया था, या तो वह गलत है या वहां कोई रहता ही नहीं। मोबाइल नंबर भी या बंद हैं या उठता नहीं है। ऐसे में ये मरीज अपने घरवालों या आस-पड़ोस के लिए घातक साबित हो सकते हैं।

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कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम के नोडल ऑफिसर अनिल गर्ग ने बताया कि जब भी कोई व्यक्ति अपनी कोरोना जांच करवाता है तो उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर निजी लैब या सरकारी लैब से स्वास्थ्य विभाग के पास पहुंचती है। स्वास्थ्य विभाग की टीम यह जानकारी कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम को देती है। कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम संबंधित व्यक्ति के पते पर पहुंचती है। पता नहीं मिलता है तो उससे फोन पर संपर्क कर लिया जाता है। 


9 मई से 19 मई तक के संक्रमित मरीजों का आंकड़ा देखा जाए तो 601 केस अनट्रेस रहे। क्योंकि जिन संक्रमित लोगों की स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मिली, उनकी जानकारी ही स्पष्ट नहीं हो पा रही है। किसी का पता गलत है तो किसी का मोबाइल नंबर बंद है। मौके पर संक्रमित भी नहीं मिला है। ऐसे में इन तक पहुंचना मुश्किल है, इसलिए इन केसों को अभी तक ट्रेस नहीं किया गया है। अनिल गर्ग ने कहा कि यह लोग संक्रमित होते हुए कोई सावधानी नहीं बरत रहे होंगे तो परिवार व आसपास के लोगों के लिए खतरा हैं। इनकी लापरवाही इनके अपनों पर ही भारी पड़ सकती है, इसलिए इनकी पहचान होना जरूरी है।   

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प्रतिदिन 800 केस, 50 अनट्रेस रह ही जाते हैं

अनिल गर्ग ने बताया कि हमारे पास प्रतिदिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगभग 800 केस आ जाते हैं। कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम जब इन केसों को ट्रेस करती है तो लगभग 50 केस अनट्रेस रह ही जाते हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि लोग अपना पता व नंबर गलत लिखवा देते हैं। ऐसे में कोई भी इनकी पहचान नहीं कर पाता है। वहीं जिस पहचान पत्र को मरीज लगाता है, वह बाहर के होते हैं, इसलिए उनके असल पते के बारे में जानकारी मिलती ही नहीं।

लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए। यह व्यवस्था उनकी सुरक्षा के लिए ही है। ऐसे में सही पता व नंबर होने पर हमारी व स्वास्थ्य विभाग की टीम उनकी देखभाल के लिए तैयार रहेगी। इससे उनका परिवार भी सुरक्षित रहेगा।  -अनिल गर्ग, नोडल ऑफिसर, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम

पहले लोग सोचते थे कि संक्रमित हो गए तो क्या होगा, लेकिन अब तो जागरूकता काफी बढ़ गई है। फिर भी लोग ऐसा कर रहे हैं। इससे हमारे प्रयास में कमी रह जा रही है। कोरोना को हराने के लिए लोगों का सहयोग बहुत जरूरी है, जो पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है। कुछ लोग संक्रमित होने बाद घर टीम न भेजने की अपील करते हैं जबकि यह कार्य उनकी सुरक्षा के लिए कर रहे हैं। - डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक 
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