अनिल गर्ग ने बताया कि हमारे पास प्रतिदिन स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगभग 800 केस आ जाते हैं। कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम जब इन केसों को ट्रेस करती है तो लगभग 50 केस अनट्रेस रह ही जाते हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि लोग अपना पता व नंबर गलत लिखवा देते हैं। ऐसे में कोई भी इनकी पहचान नहीं कर पाता है। वहीं जिस पहचान पत्र को मरीज लगाता है, वह बाहर के होते हैं, इसलिए उनके असल पते के बारे में जानकारी मिलती ही नहीं।
लोगों को ऐसा नहीं करना चाहिए। यह व्यवस्था उनकी सुरक्षा के लिए ही है। ऐसे में सही पता व नंबर होने पर हमारी व स्वास्थ्य विभाग की टीम उनकी देखभाल के लिए तैयार रहेगी। इससे उनका परिवार भी सुरक्षित रहेगा। -अनिल गर्ग, नोडल ऑफिसर, कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग टीम
पहले लोग सोचते थे कि संक्रमित हो गए तो क्या होगा, लेकिन अब तो जागरूकता काफी बढ़ गई है। फिर भी लोग ऐसा कर रहे हैं। इससे हमारे प्रयास में कमी रह जा रही है। कोरोना को हराने के लिए लोगों का सहयोग बहुत जरूरी है, जो पूरी तरह से नहीं मिल पा रहा है। कुछ लोग संक्रमित होने बाद घर टीम न भेजने की अपील करते हैं जबकि यह कार्य उनकी सुरक्षा के लिए कर रहे हैं।
- डॉ. अमनदीप कंग, स्वास्थ्य निदेशक