शिक्षा विभाग की ओर से शहर के 115 सरकारी स्कूलों में खाली पड़े शिक्षकों के 600 पद अभी तक भरे नहीं गए हैं। इस कारण स्टूडेंट्स की एक तरफ पढ़ाई प्रभावित हो रही है, वहीं सरकार के सरकारी स्कूलों में क्वालिटी एजुकेशन देने के दावों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। चंडीगढ़ में 250 जेबीटी और पंजाब और हरियाणा से डेपुटेशन पर आने वाले 350 शिक्षकों की स्वीकृति भी नहीं मिली है।
इस साल अप्रैल में नए सत्र से चंडीगढ़ से जेबीटी के 150 शिक्षक छोड़कर चले गए। वहीं 100 पोस्टें पहले की खाली थी। वहीं डेपुटेशन के 350 शिक्षकों की पोस्ट भी खाली थी। इसमें अधिकतर रिटायर हो गए और या तो अपना समय पूरा करने के बाद अपने होम स्टेट लौट गए। पंजाब और हरियाणा से इन शिक्षकाें की मांग की गई है लेकिन अभी तक उन्होंने शिक्षकाें को नहीं दिया है। इस कारण चंडीगढ़ के स्कूलाें की शिक्षा का स्तर लगातर गिर रहा है।
सर्वे रिपोर्ट में मानक के अनुसार नहीं पास हुए स्टूडेंट्स
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की ओर से किए गए स्टेट अचीवमेंट सर्वे में सरकारी स्कूलों की पोल खुल गई थी। मई में यह सर्वे रिपोर्ट आई थी। यह सर्वे 111 स्कूलाें में किया गया था। इसमें 90 स्कूलों के विद्यार्थियों के नंबर 40 फीसदी से कम आए हैं। इस बार पांचवीं और आठवीं के सभी विद्यार्थियों का यह टेस्ट लिया गया था। पांचवीं का पास प्रतिशत 24.7 और आठवीं का 38.8 प्रतिशत रहा है। दोनों में से किसी भी कक्षा का परिणाम पास प्रतिशत को क्रास नहीं कर पाया। इस रिपोर्ट के अनुसार अगर बच्चा इस सर्वे में पास नहीं होता है तो उसे उसी क्लास में पढ़ाया जाएगा। शिक्षकों की कमी के कारण यह हालात स्टूडेंट्स का बन चुका है। 250 जेबीटी शिक्षकाें की भर्ती मानव संसाधन विकास मंत्रालय की ओर से मंजूरी नहीं दी गई है।
चंडीगढ़ शिक्षा विभाग की ओर से टीचर्स की भर्ती के लिए एमएचआरडी को प्रपोजल बनाकर भेजा गया है। वहीं पंजाब एवं हरियाणा से डेपुटेशन पर भी शिक्षकों की मांग की गई है। जल्द ही शिक्षकों की कमी को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
रूबिदर जीत सिंह बराड़, डीएसई, चंडीगढ़ शिक्षा विभाग