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Alert: चंडीगढ़ में बिक रहा है घटिया दूध, फेल हुए 60 प्रतिशत सैंपल, हाईकोर्ट में हलफनामा

Tue, 20 Nov 2018 12:45 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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बच्चों को दूध देकर सेहतमंद बनाने में लगे अभिभावकों के लिए चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट में सौंपा गया हलफनामा खतरे की घंटी बजाने वाला है। जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन ने माना की चंडीगढ़ में 60 प्रतिशत लोगों को मिलावटी दूध परोसा जा रहा है। सर्विंग इन ऑर्गेनाइजेशन इन लीगल इनिशिएटिव संस्था की ओर से सीनियर एडवोकेट रीटा कोहली व एडवोकेट कीरत पाल सिंह के जरिये दूध में मिलावट को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याचिका पर सोमवार को यूटी प्रशासन ने जवाब सौंपते हुए बताया कि दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट और इससे लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव से वह अवगत हैं।
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प्रशासन इस दिशा में गंभीर है और रेगुलर चेकिंग कर सैंपल भरे जाते हैं। प्रशासन ने बताया कि 2016-17 में कुल 571 सैंपल भरे गए, जिनमें से 358 मिलावटी थे। 2017-18 में 503 सैंपल भरे गए, जिनमें से 332 मिलावटी थे। अप्रैल 2018 से अक्तूबर के बीच 6 माह में 401 सैंपल भरे गए, जिनमें से 252 मिलावटी थे। इस तरह 2016 से अब तक भरे गए 1475 सैंपल में से 942 सैंपल घटिया गुणवत्ता के और मिलावटी निकले हैं। वहीं दुग्ध उत्पादों के सैंपल की बात की जाए तो पिछले 6 माह में लिए गए 25 सैंपल में से 7 सैंपल घटिया क्वालिटी के निकले हैं।

प्रशासन द्वारा सौंपे गए आंकड़े साबित करते हैं कि हर दस में से 6 लोगों को मिलावटी दूध मिल रहा है। दुग्ध उत्पादों की स्थिति भी बेहतर नहीं है। इस मामले में हरियाणा और पंजाब ने जवाब दाखिल करने के लिए समय दिए जाने की मांग की। वहीं केंद्र ने कहा कि हमने नियम बना दिए हैं और उन्हें लागू करना राज्य का काम है और केंद्र इसमें उनके साथ है। हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन के हलफनामे को रिकार्ड पर लेते हुए हरियाणा व पंजाब को जवाब दाखिल करने का समय देते हुए सुनवाई स्थगित कर दी।
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देश के 15 करोड़ लोग पी रहे हैं मिलावटी दूध
केस की सुनवाई के दौरान बताया गया कि केंद्र सरकार की ओर से सर्वे किया गया था। इसमें 6000 से अधिक सैंपल लिए गए थे। सैंपल की जांच के बाद 10 प्रतिशत से अधिक सैंपलों में मिलावट पाई गई थी। ऐसे में केंद्र के आंकड़ों से स्पष्ट है कि देश में करीब 15 करोड़ लोग मिलावटी दूध पी रहे हैं। अगर याची की मानें तो यह संख्या 100 करोड़ से अधिक की है, क्योंकि देश में 14 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है, लेकिन दूध की खपत देश में 65 करोड़ लीटर की है। उत्पादन और खपत के बीच के इतने बड़े अंतर से सवाल उठता है कि मांग कैसे पूरी होती है, जिसका जवाब है मिलावटखोरी।
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