राज्य सरकार चालू वित्त वर्ष के अंत तक निशक्तों की भलाई पर 59 करोड़ रुपये खर्च करेगी। सरकार ने निशक्तों की सरकारी सेवाओं में सीधी भरती में तीन फीसदी आरक्षण दिया है।
तरक्की के जरिए भरने वाले पदों में भी तीन फीसदी आरक्षण किया गया है। यह विचार कैबिनेट मंत्री सुरजीत ज्याणी ने अंतरराष्ट्रीय निशक्त दिवस पर व्यक्त किए। वह समाज भलाई, महिला व बाल विकास द्वारा शिवालिक स्कूल में आयोजित राज्य स्तरीय समागम को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि निशक्तों की भलाई के लिए कानून हैं, पर लोगों को अपनी सोच बदलने की जरूरत है। निशक्तों को मान-सम्मान देना हमारी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य में नेत्रहीनों की सेवानिवृत्ति आयु 58 से बढ़ाकर 60 साल की गई है।
क्लर्कों की भरती के समय टाइप टेस्ट से छूट और विद्यार्थियों के लिए वजीफे की व्यवस्था है। निशक्तों को आर्थिक सहायता भी दी जाती है। पुडा द्वारा फ्लैट-प्लॉट के अलॉटमेंट में भी निशक्तों के लिए तीन फीसदी आरक्षण किया गया है। ज्याणी ने 15 निशक्तों को विभिन्न क्षेत्रों में सराहनीय कार्य के लिए स्टेट अवार्ड से सम्मानित किया। वहीं, निशक्तों की भलाई के लिए काम कर रहीं दो एनजीओ को भी सम्मानित किया गया।
प्रमुख सचिव जगपाल संधू ने कहा कि पंजाब में करीब डेढ़ लाख निशक्त हैं। जिनकी भलाई के लिए सरकार प्रयासरत है। डायरेक्टर गुरकीरत किरपाल सिंह ने कहा कि पंजाब देश का पहला सूबा है जहां निशक्तों को निशक्तता सर्टिफिकेट गांव स्तर पर कैंप लगाकर दिए जाते हैं।
जिला कानूनी सेवाएं अथॉरिटी के सेक्रेटरी जस्टिस टीएस बिंद्रा ने मुफ्त कानूनी सहायता और निशक्तों के लिए बने एक्ट के बारे में बताया। इस मौके पर डीसी टीपीएस सिद्धू, जिला परिषद चेयरपर्सन परमजीत कौर बडाली, अमनजोत कौर रामूवालिया भी मौजूद थे।