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550वां प्रकाश पर्व: संगत को होंगे 300 साल पुराने 16 दुर्लभ हस्तलिखित स्वरूपों के दर्शन

Sun, 20 Oct 2019 12:34 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कपूरथला
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गुरु नानक देव - फोटो : अमर उजाला
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श्री गुरु नानक देव जी के 550वें प्रकाश पर्व पर दुनिया भर से आने वाली संगत को गुरु साहिबान के करीब 300 साल पुराने 16 दुर्लभ हस्तलिखित स्वरूपों के दर्शन का सौभाग्य भी हासिल होगा। इन स्वरूपों के दर्शन-दीदार के लिए सरबत दा भला चैरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक और दुबई कारोबारी डॉ. एसपी सिंह ओबराय की ओर से 62 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं वाली एक स्पेशल बस तैयार करवाई गई है। 

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इसके अंदर सिख धर्म की मर्यादा के अनुरूप इन स्वरूपों को डिस्पले किया जाएगा। पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के श्री गुरु ग्रंथ साहिब अध्ययन विभाग की ओर से इन दुर्लभ-पुरातन हस्तलिखित को सहेजा गया है, जिन्हें यूनिवर्सिटी के सहयोग से 21 अक्तूबर को पटियाला से रवाना किया जाएगा।

ट्रस्ट के संस्थापक डॉ. एसपी सिंह ओबराय व यूनिवर्सिटी के श्री गुरु ग्रंथ साहिब अध्ययन विभाग के प्रमुख डॉ. (प्रो.) सरबजिंदर सिंह ने बताया कि 62 लाख रुपये की लागत से तैयार करवाई अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस इस विशेष बस में इन 16 पुरातन स्वरूपों को सुशोभित किया जाएगा। 
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इस बस को मंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा, प्रमुख सचिव पंजाब सरकार सुरेश कुमार, वाइस चांसलर डॉ. बीएस घुम्मन और डॉ. एसपी सिंह ओबराय 21 अक्तूबर को पंजाबी यूनिवर्सिटी के श्री गुरु ग्रंथ साहिब भवन से रवाना करेंगे। इसका पहला पड़ाव पटियाला शहर होगा और फिर यह बस बस निर्धारित रूट के अनुसार पटियाला के विभिन्न गांवों, शहरों और कस्बों से होती हुई सुल्तानपुर लोधी पहुंचेगी। 

दूसरे पड़ाव के तहत पंजाबी यूनिवर्सिटी से चलकर डेरा बाबा नानक जाएगी। फिर यह बस पंजाब के तीन तख्त साहिबान से होती हुई पंजाब से बाहर वाले दो तख्त साहिबान तक भी पहुंचेगी, जिस दौरान लाखों की संख्या में संगत इन हस्तलिखित स्वरूपों के दर्शन कर सकेगी। 
 
डॉ. सरबजिंदर सिंह ने बताया कि यह इन दुर्लभ पुरातन हस्तलिखित स्वरूप सोने, हीरे और नगों से बनी स्याही से तैयार किए हुए हैं। पंजाबी यूनिवर्सिटी के श्री गुरु ग्रंथ साहिब विभाग की तरफ से गहरी खोज करने के बाद कुछ नानक नाम लेवा सिख घरानों की तरफ से पीढ़ी दर पीढ़ी संभाले गए इन स्वरूपों को एकत्रित किया गया है, ताकि यह स्वरूप निजी मिलकियत से राष्ट्रीय संपत्ति बनाए जा सकें। 

डॉ. ओबराय ने बताया कि यूनिवर्सिटी के खोजकर्ता पूर्ण मर्यादा से इस बस की संभाल करेंगे और दुर्लभ स्वरूपों के संगत को दर्शन करवाएंगे। उन्होंने बताया कि इस बस में स्थापित डिजीटल डिस्पले बोर्ड के माध्यम से इन स्वरूपों के बारे में पंजाब में पंजाबी और अंग्रेजी जबकि दूसरे सूबों में वहां की स्थानीय भाषा व अंग्रेजी में जानकारी प्रदान की जाएगी। यह बस संगत के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगी।

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