डेरा बाबा नानक से गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के दर्शनों के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को 270 मीटर ही पैदल चलना पड़ेगा। पाकिस्तान सरकार ने सीमा से श्रद्धालुओं को गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब तक पहुंचाने के लिए बैटरी से चलने वाली बसों का इंतजाम किया है। दर्शनों के लिए रखी 20 डॉलर की फीस भरने के बाद श्रद्धालुओं को एक रसीद भी दी जाएगी जो यात्रा का आधार होगी।
गुरुद्वारा परिसर में साढ़े तीन लाख गज एरिया में संगमरमर लगाया
पाकिस्तान सरकार ने गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब के मुख्य भवन के आसपास के क्षेत्र में साढ़े तीन लाख वर्ग गज में संगमरमर बिछाया है। गुरुद्वारा परिसर में एक बड़े दीवान हॉल का निर्माण किया गया है जिसके फ्रंट का वास्तु लाहौर स्थित शाही किले के साथ मिलता है। इस दीवान हॉल में नौ नवंबर को उद्घाटन समारोह पर एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
इस प्रदर्शनी में श्री गुरु नानक देव जी के इतिहास के साथ जुड़ी उन सभी ऐतिहासिक वस्तुओं को संगत के दर्शनों के लिए रखा जाएगा, जो इस समय पाकिस्तान के पुरातत्व विभाग के पास हैं। गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब में माथा टेकने के बाद श्रद्धालु इसी दीवान हाल में बैठकर इबादत कर सकेंगे। दीवान हॉल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश भी होगा।
पाकिस्तान सरकार ने करतारपुर कॉरिडोर का निर्माण ‘यू’ शेप में किया है। डेरा बाबा नानक की तरफ से जहां भारतीय श्रद्धालु गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब माथा टेकने के लिए आएंगे, वहां दूर से ही गुरुद्वारा साहिब के दर्शन कर सकेंगे। जो गुरुद्वारा श्री करतारपुर साहिब नहीं आ पाएंगे, वह डेरा बाबा नानक से दूरबीन से खुले दर्शन कर सकेंगे।