ऐतिहासिक गुरुद्वारा मंजी साहिब में श्री गुरु नानक देव जी का 550वां प्रकाशोत्सव 12 नवंबर को धूमधाम से मनाया जा रहा है। इसकी तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। कार सेवा में स्थानीय लोग योगदान कर रहे हैं। गुरुद्वारा माता राज कौर का विशेष महत्व है। गुरुद्वारा माता राज कौर मंजी साहिब कमेटी के प्रधान राजिंदर सिंह लंबरदार, जत्थेदार कर्म सिंह लंबरदार ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब में पहली मंजिल पर 50 गुणा 120 फुट लंबा दीवान हाल बनाया जा रहा है। इस दीवान हाल के ऊपर 45 लाख की लागत से सोने का खंडा साहिब लगाया जाएगा।
कर्म सिंह लंबरदार ने बताया कि खंडा साहिब की तैयारी कार सेवा बाबा बचन सिंह और बाबा सतविंदर सिंह की ओर से दिल्ली में करवाई जा रही है। इसके साथ धार्मिक दीवान में भाग लेने के लिए पंजाब, हरियाणा से संत-महात्मा व ढाडी-कविशरी जत्थे भी पहुंच रहे हैं। श्री गुरुद्वारा ग्रंथ साहिब जी के लिए स्पेशल पालकी बनाई जा रही है। बलजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि गुरुद्वारा साहिब से कुछ ही दूरी पर जट धर्मशाला में युवाओं की ओर से सुबह चाय का लंगर शुरू किया गया है, जो गुरुपर्व तक चलता रहेगा।
गुरुद्वारा साहिब का महत्व
बलजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि सातवें गुरु श्री हर राय जी के सुपुत्र श्री राम राय की धर्मपत्नी माता राज कौर जी अपने पति से नाराज होकर देहरादून से मनीमाजरा आकर रहने लगी थीं। उनके नाराज होने का कारण यह था कि उनके पति राम राय ने औरंगजेब को खुश करने के लिए गुरुबानी की तुक बदल दी थी। यह तुक थी कि मट्टी मुसलमान की, जबकि उन्होंने मिट्टी बेईमान का उच्चारण कर दिया था। माता राज कौर को यह श्री गुरुग्रंथ साहिब की बेअदबी लगी और वह अपने पति को छोड़ कर मनीमाजरा आ गईं। इस गांव में जिस गरीब ने उनकी सेवा की थी, वहीं माता के वरदान से मनीमाजरा का पहला राजा गरीब दास बना, जिसका किला आज भी मनीमाजरा में है।
हर धर्म के लोग गुरुद्वारा साहिब में आते हैं
समाजसेवी रामेश्वर गिरि कहना कि यह शहर माता राज कौर जी ने बसा कर एक राज्य बनाया। इससे पहले यह एक छोटा सा गांव था। माता मनसा देवी का मंदिर भी मनीमाजरा के राजा ने बनाया था। राजा ने मनीमाजरा से मनसा देवी मंदिर तक एक बहुत बड़ी सुरंग बनवाई थी। मनसा देवी मंदिर में बाहर जो बड़ा दरवाजा लगा है। वह भी मनीमाजरा के राजा ने मुल्लापुर राज्य पर विजय प्राप्त कर वहां से उतार कर यहां लगाया था, जोकि आज भी लगा हुआ है। यहां माता राज कौर जी के तपो स्थान पर बने गुरुद्वारा मंजी साहिब में मनीमाजरा में रहने वाले हर धर्म के लोग सुबह या शाम को माथा टेकने आते हैं।
माता के मायके से हर साल आते हैं लोग
लंबरदार हरविंदर सिंह रिंपा ने बताया कि माता राज कौर जब नाराज होकर देहरादून से मनीमाजरा आईं तो कभी वापस नहीं गईं। उन्होंने यहीं मंजी साहिब गुरुद्वारा साहिब के स्थान पर रहकर तप किया। उनके बह्मलीन होने के बाद पास में गुरुद्वारा देहरा साहिब बनाया गया। लंबरदार रिंपा ने बताया कि आज भी माता के मायके से साल में एक बार लोग आते हैं, जो एक सप्ताह ठहरते हैं। इनकी सेवा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और मनीमाजरा के लोग करते हैं। 550वें प्रकाश उत्सव पर माता जी के गांव मानकपुरा से भारी संख्या में संगत हिस्सा लेगी।
प्रशासन को माता की याद में मनीमाजरा में बनाने चाहिए गेट
शिरोमणि अकाली दल की जरनल काउंसिल के मेंबर बलदेव सिंह ढिल्लों का कहना है कि यह चंडीगढ़ का एकमात्र ऐतिहासिक शहर है। यहां पर राजा-महाराजाओं का किला और उनके स्थान हैं। दो बड़े ऐतिहासिक गुरुद्वारे हैं, जिनके दर्शन करने के लिए दुनिया भर से श्रद्धालु आते हैं। प्रशासन को धरोहर की संभाल और पहचान के लिए कुछ करना चाहिए। प्रशासन या निगम मनीमाजरा के एंट्री सड़क पर गेट बनवाए ताकि माता राज कौर जी के ऐतिहासिक शहर का लोगों को पता चल सके।
गेट बनाने के लिए उठाएं जाएंगे कदम
लंबरदार मनजीत सिंह बावा का कहना कि ऐतिहासिक गुरुद्वारा की पहचान के लिए पहल की जाएगी। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के लोगों की एक कमेटी बनाकर एडवाजइर से लेकर डीसी और सांसद तक को लिखित में गुहार लगाई जाएंगी कि मनीमाजरा में प्रवेश द्वार बनाए जाएं। जैसा कि पंचकूला प्रशासन ने पिछले दिनों पंचकूला की एंट्री पर बनाए हैं। इसके अलावा गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी नगर निगम से अपील करती है कि 550वें प्रकाशोत्सव से पहले मनीमाजरा की सड़क की एक बार रिकारपेटिंग करवाई जाए ताकि देश-विदेश से आने वाली संगत को परेशानी न हो।