सरकारी स्कूलों के टीचर अब तक वेतन के लिए तरस रहे हैं। राज्य के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में 52 हजार से अधिक अध्यापकों के अलावा चपरासी से लेकर प्रिंसिपल तक को वेतन नहीं मिला है।
इसी प्रकार आधे से ज्यादा प्राइमरी स्कूलों में टीचरों को अभी तक तनख्वाह नहीं मिली है। इससे लेकर टीचरों में रोष है। उन्हें आशंका है कि अब जून-जुलाई का वेतन इकट्ठा ही आएगा।
पंजाब के सरकारी स्कूलों केटीचर पिछले कई महीनों से वेतन के संकट से जूझ रहे हैं। कभी डीडीओ पावर अलॉट नहीं की जातीं, तो कभी मंजूरी नहीं मिलती। कभी बजट अलॉटमेंट नहीं हो पाता। इसके चलते टीचरों का वेतन रुक जाता है। राज्य के सरकारी सीनियर सेकंडरी स्कूलों में 80 हजार से ज्यादा टीचर हैं।
इनमें करीब 52 हजार नॉन प्लांड स्कीम के तहत हैं। इनका और स्कूलों के अन्य स्टाफ का वेतन अब तक जारी नहीं किया गया है। इसी तरह बड़ी तादाद में प्राइमरी स्कूलों के टीचर भी अभी तक वेतन से महरूम हैं। इनमें गुरदासपुर, पटियाला, पठानकोट और मोहाली के स्कूल शामिल हैं।
बताया जाता है कि वित्त विभाग द्वारा बजट अलॉटमेंट न करने से यह समस्या आई है। पहले साल का बजट अलॉट होता था, अब दो महीनों का होने लगा है। पहले वित्त विभाग जिलावार बजट अलॉट करता है, उसके बाद ब्लॉक वाइज अलॉटमेंट होता है। जब तक यह नहीं होगा, वेतन जारी नहीं हो सकता।
डीए का एरियर भी बकाया
गवर्नमेंट टीचर्स यूनियन के प्रेस सचिव हरनेक सिंह मावी का कहना है कि सरकार आर्थिक संकट से जूझ रही है। इसका खामियाजा टीचरों को भुगतना पड़ रहा है। कंप्यूटर टीचरों का वेतन तीन महीनों से नहीं मिला है। टीचरों के डीए एरियर लंबे समय से बकाया पड़े हैं। बच्चों की शादी या घर बनाने को अपने ही जीपीएफ से पैसे नहीं दिए जा रहे। रिटायरमेंट बेनिफिट तक रोक दिए गए हैं।
यह समस्या मेरी जानकारी में है। वित्त विभाग में एक बिल रुकने के कारण वेतन में देरी हुई है। जल्द ही वेतन जारी कर दिया जाएगा।
- डॉ. दलजीत चीमा, शिक्षामंत्री