चंडीगढ़। शहर का एक निजी अस्पताल 50 कोविड बेड के लिए रोजाना 350 ऑक्सीजन सिलिंडरों की रिफिलिंग करा रहा था, जबकि 40 कोविड बेड दूसरा निजी अस्पताल 90 सिलिंडरों में काम चला रहा था। ऑक्सीजन सिलिंडरों के इस्तेमाल में भारी अंतर की वजह से प्रशासन को गड़बड़ी का शक है।
प्रशासन के अधिकारियों के पास शहर के कुछ निजी अस्पतालों में जरूरत से ज्यादा मेडिकल ऑक्सीजन की खपत की शिकायतें आ रही थीं, जिसके बाद शुक्रवार को एक बैठक कर सभी निजी अस्पतालों के लिए मेडिकल ऑक्सीजन का रोजाना के लिए कोटा तय कर दिया गया है। कोटा तय होने के बाद भी कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए यह भी तय कर दिया गया है कि कौन सा निजी अस्पताल किस एजेंसी से रोजाना ऑक्सीजन भरवाएगा और किसकी देखरेख में भरवाएगा। शहर के ऑक्सीजन सप्लाई के नोडल अधिकारी यशपाल गर्ग की तरफ से शुक्रवार को इस संबंध में आदेश जारी किया गया है। गर्ग ने बताया कि केंद्र सरकार की तरफ से शहर के लिए 20 एमटी मेडिकल ऑक्सीजन का कोटा तय किया है। बीते कुछ दिनों में कई मिनी कोविड केयर सेंटर खुल गए हैं और वहां भी ऑक्सीजन की खपत हो रही है। सीमित ऑक्सीजन होने की वजह से और उपलब्ध ऑक्सीजन का सही जगह इस्तेमाल हो, इसलिए ही निजी अस्पतालों के लिए रोजाना के ऑक्सीजन का कोटा तय किया गया है।
अस्पताल का नाम कुल बेड कोविड बेड डी-टाइप सिलिंटर के लिए कोटा व एजेंसी
ईडन अस्पताल 60 50 120 (सुपर एजेंसीज)
सिटी/अपोलो अस्पताल 25 14 30 (सुपर एजेंसीज)
लैंडमार्क अस्पताल 50 40 80 (चंडीगढ़ गैसीज)
मुकट अस्पताल 53 22 50 (सुपर एजेंसीज)
हीलिंग अस्पताल 50 28 70 (सुपर एजेंसीज)
संतोख अस्पताल 35 28 70 (चंडीगढ़ गैसीज)
केयर पार्टनर्स 18 13 30 (सुपर एजेंसीज)
मिनी कोविड सेंटर्स - - 5 (सुपर एजेंसीज)
क्या कहते हैं अधिकारी
ऑक्सीजन की आपूर्ति सीमित है। हम कोशिश कर रहे हैं कि जिसे जितनी ऑक्सीजन की जरूरत है, उसे बिना किसी समस्या के मिले। निजी अस्पतालों में कोविड बेड के अनुसार ऑक्सीजन का कोटा तय किया है। हालांकि, किसी अस्पताल को कमी महसूस होगी, तो जरूरत के अनुसार उसे पूरा करेंगे। - यशपाल गर्ग, नोडल अधिकारी, ऑक्सीजन आपूर्ति