शहर की डिस्पेंसरी और सरकारी अस्पतालों में इलाज करने वालों के लिए राहत की सूचना है। अगले महीने से मरीजों को केमिस्ट से महंगी दवाएं खरीदने के लिए जेबें ढीली नहीं करनी पड़ेंगी।
यूटी प्रशासन के हेल्थ विभाग ने अगले महीने से सभी डिस्पेंसरी,जीएमसीएच 32, मनीमाजरा,सेक्टर-22 और सेक्टर-16 सरकारी अस्पताल में निशुल्क दवाओं की संख्या में इजाफा करने का फैसला लिया है। मरीजों को 49 तरह की दवाएं अस्पताल से ही मिल जाएंगी।
हेल्थ विभाग के अधिकारियों ने अधिक डिमांड में रहने वाली दवाओं की सूची तैयार कर प्रशासनिक अधिकारियों से अप्रूवल भी ले ली है। जल्द ही दवाओं की सप्लाई करने वाली कंपनियों को भी फाइनल कर लिया जाएगा।
वीरवार को हेल्थ सचिव ने डायरेक्टर हेल्थ सर्विसेज को अक्तूबर से हर हाल में निर्धारित की गई 49 दवाओं को सभी डिस्पेंसरी और अस्पताल में उपलब्ध कराने के आदेश दिए हैं।
मेयर पूनम शर्मा ने बताया कि शहर में चार नए 50 बेड के अस्पताल बनाने का प्रपोजल तैयार किया जा चुका है। पहले चरण में मलोया और सेक्टर-48 में 2 अक्तूबर को नींव पत्थर रखा जाएगा।
डॉक्टर लिख रहे महंगी दवाईयां: अब सरकारी डिस्पेंसरी या अस्पताल में मरीजों को बाहर से महंगी दवाऐं खरीदने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकेगा। हेल्थ सचिव के पास सरकारी डॉक्टरों द्वारा मरीजों को अधिकतर दवाएं बाहर से लिखे जाने की शिकायतें मिल रही हैं।
सूत्रों के अनुसार जल्द ही यूटी प्रशासन ऐसे डॉक्टरों पर कार्रवाई की तैयारी कर रहा है। यूटी हेल्थ विभाग की टीम डिस्पेंसरी और सरकारी अस्पतालों के मरीजों से फीडबेक लेकर रिपोर्ट सौंपेंगे। हेल्थ सचिव अनुराग अग्रवाल ने भी माना कि सरकारी अस्पताल के डॉक्टर द्वारा महंगी दवाएं लिखे जाने की शिकायतें मिली हैं।
अनुराग अग्रवाल, हेल्थ सचिव यूटी ने बताया कि प्रशासन ने सभी डिस्पेंसरी और सरकारी अस्पतालों में अगले महीने तक हर हाल में 49 दवाएं निशुल्क वितरण का फैसला लिया है। कंपनियों से दवा खरीदने के लिए जल्द टेंडर जारी किया जाएगा। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर द्वारा महंगी दवाएं लिखने पर विभाग कार्रवाई करेगा।