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Chandigarh News: 49 आयुष केंद्र, यूनानी डॉक्टर सिर्फ एक<bha>;</bha> दो पद वर्षों से खाली

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विशेषज्ञों की कमी से मरीजों को नहीं मिल रहा यूनानी चिकित्सा का पर्याप्त लाभ
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डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों से संपर्क कर रहा विभाग
अनुबंध पर डॉक्टरों की तैनाती की कोशिश, योग्य विशेषज्ञ नहीं मिलने से भर्ती प्रक्रिया बनी चुनौती

माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। आयुष चिकित्सा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी इन कोशिशों के सामने चुनौती बनी हुई है। चंडीगढ़ में यूनानी चिकित्सा पद्धति की स्थिति इसका उदाहरण है। शहर में 49 आयुष केंद्र संचालित होने के बावजूद महज एक केंद्र पर यूनानी डॉक्टर तैनात है, जबकि दो पद वर्षों से खाली पड़े हैं। ऐसे में यूनानी पद्धति से इलाज कराने के इच्छुक मरीजों के लिए उपलब्ध सुविधाओं का दायरा सीमित बना हुआ है।
विभाग की ओर से रिक्त पदों को भरने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए दूसरे राज्यों के यूनानी मेडिकल कॉलेजों से भी संपर्क किया जा रहा है, ताकि वहां से योग्य डॉक्टरों को अनुबंध के आधार पर चंडीगढ़ में तैनात किया जा सके। हालांकि, विशेषज्ञों की उपलब्धता की कमी के कारण नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाना आसान नहीं है। अनुबंध पर नियुक्ति की व्यवस्था के चलते विभाग नियमित विज्ञापन जारी कर भर्ती करने की स्थिति में भी नहीं है। ऐसे में खाली पदों को भरने और मरीजों तक सुविधा पहुंचाने की चुनौती बनी हुई है।
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मरीजों को नहीं मिल रहे इलाज के सभी विकल्प
आयुष केंद्रों में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों के लिए डॉक्टर की उपलब्धता सबसे अहम है। यदि किसी मरीज को आयुर्वेद या होम्योपैथी के बजाय यूनानी पद्धति से परामर्श या उपचार की जरूरत है, तो उसके विकल्प सीमित हो जाते हैं। शहर में 49 केंद्रों का नेटवर्क होने के बावजूद यूनानी चिकित्सा के लिए केवल एक डॉक्टर पर निर्भरता इस सुविधा की पहुंच को प्रभावित कर रही है।
दोनों रिक्त पद भरने और अलग-अलग केंद्रों पर विशेषज्ञों की उपलब्धता सुनिश्चित होने से मरीजों को अपने क्षेत्र के नजदीक उपचार का विकल्प मिल सकता है। इससे उन लोगों को भी सुविधा होगी, जो लंबे समय से यूनानी चिकित्सा पद्धति से इलाज कराते आ रहे हैं या इस पद्धति के तहत परामर्श लेना चाहते हैं।
क्या है यूनानी चिकित्सा पद्धति का महत्व?
यूनानी चिकित्सा आयुष की प्रमुख पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में शामिल है। इसमें मरीज के खानपान, जीवनशैली, शरीर की प्रकृति और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों को ध्यान में रखकर उपचार की योजना बनाई जाती है। इसके तहत आहार संबंधी सलाह, जीवनशैली में बदलाव और कुछ औषधीय उपचारों का इस्तेमाल किया जाता है।
यूनानी चिकित्सा में पाचन संबंधी शिकायतों, कुछ त्वचा रोगों, जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द तथा लंबे समय से बनी कुछ स्वास्थ्य समस्याओं के प्रबंधन के विकल्प बताए जाते हैं। हालांकि, किसी बीमारी में इसका लाभ उसकी प्रकृति, मरीज की स्थिति और उपलब्ध वैज्ञानिक साक्ष्यों पर निर्भर करता है। इसे हर बीमारी का निश्चित या कारगर इलाज नहीं माना जा सकता।
विशेषज्ञों की उपलब्धता बढ़ाना जरूरी
शहर में आयुष केंद्रों का नेटवर्क होने के बावजूद यूनानी डॉक्टरों के दो पद खाली रहना सुविधा की पहुंच से जुड़ा सवाल खड़ा करता है। विभाग दूसरे राज्यों के मेडिकल कॉलेजों के माध्यम से योग्य डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की कोशिश कर रहा है। अब चुनौती इन रिक्त पदों को भरकर मरीजों को यूनानी चिकित्सा के लिए बेहतर विकल्प उपलब्ध कराने की है।
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कोट-

नियुक्ति प्रक्रिया के तहत यूनानी डॉक्टरों की तैनाती के प्रयास लगातार जारी हैं, लेकिन विशेषज्ञों की सीमित उपलब्धता के कारण सफलता नहीं मिल पा रही है। डॉक्टरों की तलाश के लिए दूसरे राज्यों के यूनानी मेडिकल कॉलेजों से भी संपर्क किया जा रहा है। -डॉ. अतुल ढाकणे, निदेशक, आयुष विभाग
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