हजारों टन गेहूं कैसे खराब हुआ, इसकी उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। खराब हुआ गेहूं लाखों लोगों को मुफ्त में मिल सकता था। सरकार गेहूं के भंडारण की उचित व्यवस्था करे। गुरनाम सिंह चढ़ूनी, अध्यक्ष, भाकियू, चढ़ूनी गुट।
हाईकोर्ट के कार्यरत न्यायाधीश से करवाएं जांच: कांग्रेस
कांग्रेस की स्टीयरिंग कमेटी की सदस्य कुमारी सैलजा और राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला ने गेहूं खराब होने के मामले की जांच हाईकोर्ट के कार्यरत न्यायाधीश से करवाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि 94 करोड़ रुपये का गेहूं खराब खराब दिखाया जा रहा है। अच्छे गेहूं को आपसी मिलीभगत कर खुले बाजार में बेचा गया और उसकी जगह खराब गुणवत्ता का गेहूं गोदामों में रखवाकर सड़ा दिखाया। यह सरकार के संरक्षण बिना नहीं हो सकता।
गेहूं पर पानी डालते पकड़ा जा चुका स्टाफ
हरियाणा के गोदामों से गेहूं को चोरी-छिपे बेचना सामान्य बात है। बेचे गए गेहूं की मात्रा को पूरा करने के लिए बड़े अधिकारी, कर्मचारियों से बोरियों पर पानी डलवाते हैं, इससे वजन तो बढ़ जाता है लेकिन नमी बनने पर गेहूं खराब होने लगता है। 12 जून, 2022 को जगाधरी व फरवरी 2022 में सोनीपत के माहरा स्थित गोदाम में कर्मचारी गेहूं पर पानी डालते पकड़े जा चुके हैं। खुले में रखा गेहूं तिरपाल से ढका नहीं होता, बारिश होने पर यह भीगकर खराब हो जाता है। करनाल की इंद्री में पिछले दिनों हजारों क्विंटल गेहूं खराब हुआ था। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की राज्य स्तरीय टीम ने जांच के बाद दो अधिकारियों को निलंबित किया था।