चंडीगढ़। जीसीजी-42 में ‘अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस’ मनाया गया। यह दिवस पंजाबी, हिंदी, इतिहास, समाज शास्त्र आदि विभाग के सहयोग से मनाया गया। इसमें कॉलेज की अलग-अलग संकाय की छात्राओं ने बड़े ही उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने अनुभव साझा किए। कार्यक्रम की शुरुआत में छात्रा नेहा ने अपनी लिखी किताब के बारे में बताया और छात्रा सुमन ने गीत गाकर भाषा का सुंदर उदाहरण प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर पंजाबी विभाग की डॉ. कंचन ने कहा कि आज की पीढ़ी को अपनी भाषा के साहित्य का अध्ययन करना चाहिए। इसके बाद इतिहास विभाग की डॉ. पूर्णेंदु रंजन ने मातृ भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला और छात्रों से मातृ भाषा के संरक्षण के लिए प्रयास करने की अपील की। समाज शास्त्र विभाग के अध्यक्ष डॉ रंजय वर्धन ने कहा कि हम दो सप्ताह में एक भाषा खो रहे हैं और दुनिया की 43 प्रतिशत भाषाएं विलुप्त होने के कगार पर हैं। उन्होंने छात्रों से भावनात्मक रूप से अपनी संस्कृति पर गर्व करने की अपील की। पंजाबी विभाग की डॉ. सुरिंद्र कौर ने अपने वक्तव्य में स्वभाषा के मूल को जानने समझने और अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया।
भाषा संचार का सबसे अच्छा माध्यम: डॉ. संगम
पंजाबी विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरमेल सिंह ने कहा कि छात्रों को अपनी संस्कृतियों के साहित्य का अध्ययन करने और अध्ययन से उत्पन्न विचारों को साझा करने के लिए समूह बनाने चाहिए। हिंदी विभाग के डॉ. संगम वर्मा ने इस गोष्ठी का समन्वय किया और कहा कि भाषा संचार का सबसे अच्छा माध्यम है। इसी से हमारी निजता की पहचान है। बताया कि, रसूल हमजातोल ने कहा था कि यदि किसी राष्ट्र को समाप्त करना है तो सबसे पहले वहां की भाषा को खत्म करो, यदि किसी देश को संपन्न बनाना है तो वहां भाषा का संवर्धन करें। इस गोष्ठी में डॉ. जगजीत कौर, डॉ. किरणजीत कौर, डॉ. मीता कौशिक, डॉ. अवतार सिंह आदि उपस्थित रहे।