चंडीगढ़ प्रशासन शहर की 42 दफ्तरों की इमारतों को दिव्यांग फ्रेंडली बनाएगा। इन इमारतों में दिव्यांगों के लिए लिफ्ट, रैंप और ग्रिल का निर्माण कराया जाएगा। यूटी इंजीनियरिंग विभाग रैंप व लिफ्ट आदि के निर्माण पर करीब 8 करोड़ रुपये खर्च करेगा। सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर सीबी ओझा ने बताया कि दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरा कर लिया जाएगा।
गौरतलब है कि जून 2016 में स्वयाम नेशनल सेंटर ने अपनी ऑडिट रिपोर्ट में शहर की करीब 42 इमारतों को दिव्यांगों के लिए असुविधाजनक बताया था। इसके बाद समाज कल्याण विभाग के सचिव के नेतृत्व में एक कमेटी गठित की गई थी। इसमें चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद, चीफ आर्किटेक्ट कपिल सेतिया और तमाम संगठनों के प्रतिनिधि शामिल थे। कमेटी ने 2016 में करीब 42 इमारतों को ऑडिट में फेल होने के चलते नोटिस दिए थे।
इन इमारतों में पाई गई थी खामियां
2016 में पहले चरण में इमारतों पर जाकर प्रारंभिक सर्वेक्षण करने के बाद रिपोर्ट तैयार की गई थी। इसमें शहर के अधिकतर पुलिस स्टेशन, पर्यटन स्थल, ई-संपर्क केंद्र और सरकारी कार्यालय शामिल हैं। शॉर्ट लिस्ट किए गए भवनों में आर्किटेक्चर सेंटर, सेक्टर 17, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट, सेक्टर -43 जिला अदालत, नगर निगम भवन, सेक्टर 17, बेअंत सिंह मेमोरियल, सेक्टर 42, एस्टेट कार्यालय और सेक्टर -17 मार्केट शामिल हैं।
रॉक गार्डन व कैपिटल कॉम्पलेक्स भी लिस्ट में शामिल
Municipal Corporation office Chandigarh
- फोटो : File Photo
रॉक गार्डन व कैपिटल कॉम्पलेक्स भी लिस्ट में शामिल
इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट से मिली जानकारी के अनुसार इन 42 इमारतों में कैपिटल कांप्लेक्स, रॉक गार्डन समेत कई पर्यटक स्थल शामिल है। इसके अलावा शहर के कई सरकारी अस्पतालों में दिव्यांगो के लिए रैंप, लिफ्ट, रेलिंग के बंदोबस्त नहीं थे। इनमें जीएमएसएच-16, 22 डिस्पेंसरी, सेक्टर-45 अस्पताल शामिल था।
शहर में करीब 14500 दिव्यांग
एक सर्वे के मुताबिक शहर में इस समय करीब 14500 दिव्यांग रहते है। डिसऐबिल्टी एक्ट 1995 के मुताबिक दिव्यांगों को सरकारी संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाए। ताकि लोग उन्हें कोई दिक्कत न हाें।