मेवात बार के प्रधान एवं वरिष्ट ऐडवोकेट ताहिर हुसैन रूपडिया ने बताया कि मेवात इलाके में करीब 60 फीसदी रेप और 50 फीसदी मर्डर के मामले में अदालत का फैसला आने से पहले ही बिरादरी में फैसला हो जाता है और पीड़ित पक्ष अपनी गवाई बिगाड़ देता है, जिससे आरोपी बरी हो जाते हैं। अदालत में बिरादरी फैसले का कोई जिक्र नहीं होता है।
उन्होंने बताया कि मेवात के कोट, जमालगढ़, पचगावं, राहड़ी जैसे दर्जन भर मामले हैं, जिनमें पंचायतों के माध्यम से फैसले हुए हैं। उन्होंने बताया कि इन फैसलों में लालच या राजनैतिक दबाव अधिक होते हैं। उधर पूर्व मंत्री मोहम्मद इलयास ने फोन पर बताया कि वह पंचायत में मौजूद नहीं थे, लेकिन उसका लड़का ऐडवोकेट जावेद मौजूद था। उसने सुना है कि चार लाख में फैसला हो गया है।
असमत (रेप) लुट जाने या मर्डर हो जाने वाले परिवार का उस समय खून खोल जाता है और वे आरोपियों को कड़ी से कड़ी यहां तक फांसी की सजा की मांग तक कर देते हैं। लेकिन धीरे-धीरे यह खुमार लालच, दवाब आदि में बदल जाता है और रेप और मर्डर के मामलों में भी लोग फैसला कर लेते हैं। यहां असमत और मर्डर को पैसों से तोलना आम बात हो गई है। पुलिस विभाग मानता है कि मेवात में रेप के अधिक्तर मामलों में समझौता हो जाता है। मेवात इलाके में रेप के कई ऐसे मामले सामने आऐ हैं, जिनका पांच से दस लाख रुपये तक में फैसले हुए हैं वहीं मर्डर के बहुचर्चित कोट, जमालगढ, राहड़ी आदि ऐसे मामले में जहां लाखों रुपये पीड़ित परिवार को दिलाकर पंचायत ने फैसले कराए हैं।