सोलह साल की लंबी लड़ाई के बाद प्रशासन के 3930 वर्तमान व सेवानिवृत्त कर्मचारियों वीरवार को बड़ी राहत मिल गई। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को आदेश दिया कि यूटी इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम (सेल्फ फाइनेंस) के तहत 3930 फ्लैट के लिए भूमि की कीमत वर्ष 2008 में जारी ब्रॉशर के अनुसार ही कर्मचारियों से ली जाए।
आदेश के मुताबिक, कर्मचारियों से भूमि की बढ़ी हुई कीमत नहीं वसूली जा सकती हालांकि कर्मचारियों को फ्लैट के निर्माण की लागत वर्तमान में आने वाले खर्च के अनुसार ही अदा करनी होगी। इस आदेश से कर्मचारियों को जमीन वर्तमान कीमत से करीब दस गुना कम दाम पर मिल जाएगी। हालांकि अभी विस्तृत आदेश आना बाकी है। मामले में फूल कुमार सैनी ने वर्ष 2013 में याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट को बताया था कि चंडीगढ़ प्रशासन के 3930 सरकारी कर्मचारियों के लिए वर्ष 2008 में यूटी इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम (सेल्फ फाइनेंस) तैयार की थी। इसके लिए कर्मियों से कुछ राशि लेकर ड्रा 2010 में निकाला गया।
इसके बाद काफी अरसे तक योजना ठंडे बस्ते में रही और बाद में प्रशासन ने इसे समाप्त करने का निर्णय ले लिया। प्रशासन ने हाईकोर्ट को बताया कि समय के साथ जमीन की कीमत काफी बढ़ गई है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद केंद्र सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन दोनों ने अपनी सहमति देते हुए जमीन आवंटित कर दिया लेकिन प्रशासन ने जून 2019 में एक पब्लिक नोटिस जारी कर बनने वाले फ्लैट्स के रेट तय कर दिए जो पहले के मुकाबले कई गुना अधिक थे। इसमें एक बेडरूम वाले फ्लैट की कीमत 58 लाख, दो बेडरूम वाला फ्लैट 1.35 करोड़ और तीन बेडरूम वाले फ्लैट की कीमत 1.76 करोड़ तय की गई।
इस नोटिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए प्रशासन को इसका हल निकालने के लिए बैठक बुलाने को कहा था। इसके बाद हाईकोर्ट में प्रशासन की ओर से जानकारी दी गई कि केंद्रीय गृह सचिव ने प्रशासक के सलाहकार के साथ बैठक कर इसको लेकर प्रस्ताव तैयार करने को कहा था। प्रशासक के सलाहकार के आदेश पर हाउसिंग बोर्ड ने दो प्रस्ताव तैयार किए थे, जिन्हें आवंटियों के प्रतिनिधियों को दिखाया गया। इन दोनों प्रस्तावों में दाम बहुत अधिक होने की बात कहते हुए कर्मचारियों ने इन्हें खारिज कर दिया।
प्रशासन ने कहा कि दाम तय करना उनके हाथ में नहीं है बल्कि केंद्र की कैबिनेट के पास है। ऐसे में दाम कम करने या फिर कर्मचारियों के पैसे वापस करने का जो भी फैसला है वह केंद्र ही ले सकता है। हाईकोर्ट ने इस पर केंद्र सरकार को निर्णय लेकर जवाब दाखिल करने का आदेश जारी किया था। बाद में 18 मार्च को हाईकोर्ट ने इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
ब्रॉशर (वर्ष 2008) में बताए गए रेट
कैटेगरी ए - 34.70 लाख
कैटेगरी बी- 24.30 लाख
कैटेगरी सी - 13.53 लाख
कैटेगरी डी- 05.76 लाख
7827 कर्मियों ने किया था आवेदन, 3930 हुए थे सफल
यूटी प्रशासन ने वर्ष 2008 में यूटी इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम को लांच किया था। इसमें 7827 कर्मियों ने आवेदन किया था। वर्ष 2010 में ड्रॉ निकाला गया, जिसमें 3930 कर्मचारी चयनित हुए थे। स्कीम के लिए सेक्टर-52 ,53 ,व 56 में जमीन आवंटित की जानी थी। इसके लिए कर्मियो ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को 56 करोड़ रुपये भी अदा कर दिए थे लेकिन हाउसिंग बोर्ड ने यह रकम प्रशासन को जमा ही नहीं करवाई। इसके चलते जमीन आवंटित नहीं हो पाई। बाद में जमीन के दाम बढ़ जाने से योजना को रद्द करने का फैसला ले लिया गया।
छत के इंतजार में दुनिया से विदा हो गए 100 से ज्यादा कर्मचारी
यूटी इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम पर हाईकोर्ट के आदेश से प्रशासन के कई वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों में खुशी की लहर है। उनका कहना है कि अपनी छत के इंतजार में 100 से ज्यादा कर्मचारी दुनिया से विदा हो गए। आज उनकी आत्मा को शांति मिली होगी। 16 साल की लड़ाई आज सफल होती दिख रही है मगर उनका संघर्ष फ्लैट्स मिलने तक जारी रहेगा। हाईकोर्ट के आदेश पर अब स्कीम के लिए चुने गए 3930 कर्मचारियों को सेक्टर-52, 53 और 56 में अलग-अलग कैटेगरी के फ्लैट मिल सकेंगे।
यूटी इंप्लाइज हाउसिंग वेलफेयर सोसाइटी के महासचिव डॉ. धर्मेन्द्र ने बताया कि हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, जमीन का रेट ब्रॉशर के तहत लगाया जाएगा और कंस्ट्रक्शन की लागत आज के रेट से लगेगी। स्कीम में चंडीगढ़ प्रशासन ने जो नए कलेक्टर रेट केंद्रीय कैबिनेट से मंजूर करवाकर लागू किए थे, उसमें प्रशासन ने इंप्लाइज को कैटेगरी ए के लिए 1.51 करोड़, कैटेगरी बी के लिए 1.17 करोड़, कैटेगरी सी के लिए 69 लाख और कैटेगरी डी के लिए 49 लाख में ऑफर किए गए थे, लेकिन हाईकोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के 2012 में जारी पत्र के बारे में कहा कि स्कीम 2008 में लांच हुई तो 2012 में जारी पत्र इस स्कीम पर पिछली तारीख से कैसे लागू हो सकता है इसलिए जमीन का रेट ब्रॉशर के तहत लागू करने के आदेश दिए और कंस्ट्रक्शन कास्ट आज के लगाए जाने के लिए आदेश दिए। डॉ. धर्मेन्द्र ने बताया कि 100 से ज्यादा लोग फ्लैट का सपना लिए दुनिया से रुख्सत हो चुके हैं जबकि सैकड़ों कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं।