इराक के मोसुल में मारे गए पंजाब के युवकों का मुद्दा सदन में भी गर्माया। मुआवजे को लेकर कांग्रेस और शिअद ने एक-दूसरे के पाले में गेंद फेंकी। शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम मजीठिया ने कहा कि मारे गए युवकों के परिजनों को 20 हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाना था, पर नहीं मिले। इस पर सीएम ने परिवारों को फरवरी-मार्च की 20 हजार रुपये पेंशन तुरंत जारी करने और तिमाही अदायगी की शर्त खत्म करने के निर्देश दिए। शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठा। नेता प्रतिपक्ष सुखपाल खैरा ने कहा कि इराक में 39 भारतीय मारे गए हैं, जिनमें 27 पंजाब के हैं।
पाकिस्तान की जेल में मारे गए सरबजीत के परिजनों को एक करोड़ रुपये और सरकारी नौकरी दी गई थी। इनके परिजनों को भी एक-एक करोड़ मुआवजा और सरकारी नौकरी दी जाए। सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। 11 युवक अमृतसर, 11 जालंधर के हैं, पांच के बारे में अभी पता लगना है। उनकेशव एक सप्ताह में आने की उम्मीद है। मुआवजे की निर्धारित प्रक्रिया है, जिसमें शहीद भी आते हैं। नीति के मुताबिक ही मुआवजा दिया जाएगा।
बिक्रम मजीठिया ने कहा कि परिवार बहुत गरीब हैं, जिनका अधिकतम हो सके, दिया जाए। उन्होंने कहा कि युवकों के परिजनों को बीस हजार रुपये प्रतिमाह दिया जाना था, पर नहीं मिले। यह ध्यान रखा जाए कि शव आने पर परिजनों को परेशानी न हो।
दिल्ली चलकर एक करोड़ मांगते हैं: सोढी
खैरा ने कहा कि मृतकों के परिजनों को एक -एक करोड़ और सरकारी नौकरी दी जाए। इस पर कांग्रेस के राणा सोढी ने कहा कि यह राज्य नहीं, केंद्र की जिम्मेदारी है। दिल्ली चल कर एक करोड़ और नौकरी मांगते हैं। कांग्रेस के कुशलदीप ढिल्लों ने हरसिमरत कौर का नाम लिए बगैर अकालियों से कहा कि उनसे कहा जाए, वह भी केंद्र से बात करें। सीएम ने कहा कि ये हत्याएं देश से बाहर हुई हैं, इसलिए मुआवजे की जिम्मेदारी केंद्र की है। पर सरकार केंद्र से किसी राजनीति में नहीं उलझेगी।