चंडीगढ़। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा व न्यायमूर्ति अनूप चितकारा के मार्गदर्शन में शनिवार को जिला न्यायालय परिसर, सेक्टर-43 में राष्ट्रीय लोक अदालत आयोजित की गई। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित लोक अदालत में 14 पीठों का गठन किया गया।
पीठों के समक्ष समझौता योग्य आपराधिक मामले, चेक संबंधी 138 के मामले, बैंक ऋण वसूली, मोटर दुर्घटना दावा, वैवाहिक व श्रम विवाद, मध्यस्थता, दीवानी मामले, नगर निगम से जुड़े मामले और यातायात चालान रखे गए। न्यायिक पीठों ने लंबित और मुकदमा-पूर्व मामलों सहित कुल 30,145 मामलों का निपटारा किया। इनमें 18,48,13,828 रुपये की राशि पर समझौता हुआ।
नियमित पीठों और स्थायी लोक अदालत ने 16,38,342 रुपये से जुड़े 20,230 मुकदमा-पूर्व मामलों का निपटारा किया। राज्य एवं जिला उपभोक्ता आयोग ने 4,25,76,94,574 रुपये से जुड़े 62 मामलों और ऋण वसूली अधिकरण-द्वितीय ने 7.79 करोड़ रुपये से जुड़े 10 मामलों का निपटारा किया।
बच्चे के हित पर दिया जोर
एक लंबित वैवाहिक विवाद में हरिंदर सिद्धू, कार्यवाहक जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने दोनों पक्षों से बातचीत की। पीठ ने कहा कि वैवाहिक विवादों में नाबालिग बच्चे का कल्याण सबसे महत्वपूर्ण है। दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से समाधान के लिए समय मांगा। अधिकारियों ने आमजन से विवादों के त्वरित और सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील की।