कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर)
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जिला प्रशासन ने जालंधर के सिविल अस्पताल में एक पोस्ट कोविड रिकवरी वार्ड तैयार करवाया है। इस वार्ड को बनवाने का मकसद यह है कि अगर किसी कोरोना संक्रमित मरीज के ठीक होने के बाद भी उसका ऑक्सीजन लेवल कम रहता है तो वह मरीज इस पोस्ट रिकवरी वार्ड में भर्ती रह सकेगा।
फिलहाल अभी तक मरीज का कोरोना टेस्ट निगेटिव होने के बाद उसे घर भेज दिया जाता था। मगर घर पहुंचने के बाद उसकी देखभाल नहीं हो पाती थी। अब अगर ऑक्सीजन लेवल कम होने की वजह से मरीज इस रिकवरी वार्ड में भर्ती रहता है तो डॉक्टर लगातार उनकी सेहत की देखभाल कर सकेंगे।
गुरुवार को शुरू हुए इस वार्ड में फिलहाल 30 बेड लगाए गए हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अगर जरूरत पड़ी तो बेडों की संख्या और बढ़ाई जा सकती है। इस वार्ड में मरीजों के लिए ऑक्सीजन की बेहतर व्यवस्था की गई है। दरअसल, कोरोना के कारण तेज हुई ऑक्सीजन सिलिंडर की मांग को देखते हुए प्रशासन ने इस पोस्ट कोविड रिकवरी वार्ड को तैयार करवाया है। अब अगर किसी मरीज को लगता है कि उसे ऑक्सीजन की कमी है तो वह इस वार्ड में आकर अपना इलाज करा सकता है।
वैक्सीन सप्लाई न होने से 200 सेंटरों में से 80 फीसदी बंद
जालंधर के सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में लगभग 200 वैक्सीनेशन सेंटर बनाए गए थे। इनमें से लगभग 80 फीसदी सेंटरों में वैक्सीन की आपूर्ति न होने के कारण ताले लटका दिए गए हैं। गुरुवार को सिविल अस्पताल में बनाए गए कोरोना वैक्सीन सेंटर में भी ताला लगा दिया गया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने सेंटर के बाहर वैक्सीन खत्म होने की एक नोटिस भी चिपका दी। इसमें उन्होंने लिखा है कि वैक्सीन खत्म होने के कारण सेंटर अभी बंद रहेगा।
बता दें कि वैक्सीन की कमी के चलते कोविड रोधी टीकाकरण प्रक्रिया को निजी अस्पतालों में पहले ही बंद किया जा चुका है। यहां तक कि जिन लोगों ने इन अस्पतालों से पहली डोज लगवाई थी, उन्हें भी सरकारी अस्पताल में आने को कहा गया है। वहीं, अब सरकारी अस्पतालों में भी वैक्सीन न आने के कारण ताले लटकने लगे हैं। जिला टीकाकरण अफसर डॉ. राकेश चोपड़ा का कहना है कि वैक्सीन खत्म होने की वजह से सेंटर बंद किए गए हैं लेकिन जैसे ही वैक्सीन आएगी, सेंटर दोबारा से चालू कर दिए जाएंगे।