राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का फैसला न मानने पर उपभोक्ता फोरम-1 ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के दो अधिकारियों मुख्य कार्यकारी अधिकारी राडने एल राल्टे (आईएएस) और सचिव मनदीप कौर को तीन-तीन महीने की सजा सुनाई है।
आयोग ने दोनों अधिकारियों को पांच-पांच हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना न भरने पर एक महीने की अतिरिक्त जेल होगी। यह फैसला उपभोक्ता फोरम-1 के अध्यक्ष पीएल आहुजा और इसके सदस्य रजिंदर सिंह गिल और सुरजीत कौर ने सुनाया।
यह था मामला
सेक्टर-45 सी के मकान नंबर 2064 निवासी राज कुमार ने चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के खिलाफ उपभोक्ता फोरम में शिकायत दी थी। फोरम ने शिकायत को खारिज कर दिया था। उसके बाद शिकायतकर्ता ने उपभोक्ता आयोग में अपील की।
इस पर आयोग ने पिछले साल 11 जनवरी को निर्देश दिए कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड शिकायतकर्ता के मकान को लीज होल्ड से फ्री होल्ड करे साथ ही 10 हजार रुपये मुआवजा और पांच हजार रुपये मुकदमा खर्च अदा करे।
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने मुआजवा और मुकदमा खर्च तो अदा कर दिया लेकिन लीज होल्ड से फ्री होल्ड नहीं किया। एक वर्ष और पांच महीने बीत जाने के बाद भी हाउसिंग बोर्ड ने आयोग के फैसले को नहीं माना।
चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड ने फोरम को बताया कि लीज होल्ड से फ्री होल्ड करने का अधिकार चंडीगढ़ प्रशासन को है। यह प्रशासन के पास विचाराधीन है, लेकिन फोरम ने उसकी दलील नहीं मानी।
फोरम ने कहा कि चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को आदेश का पालन करना चाहिए या उन्हें राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में अपील करनी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
कंज्यूमर कोर्ट बार एसोसिएशन चंडीगढ़ के अध्यक्ष पंकज चांदगोठिया ने कहा है कि उपभोक्ता अदालत के इस फैसले से कंज्यूमर कोर्ट का सर्वोच्चता सिद्ध होती है और इससे उच्च अधिकारियों के काम करने के तरीके में बदलाव होगा।