12 साल के बाद आज दो योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। नक्षत्र बताते हैं कि आज का दिन बहुत शुभ है। आज दुर्लभ रवि पुष्य और गजकेसरी योग बन रहा है। 26 अप्रैल दिन रविवार को रविपुष्य योग के अलावा गजकेसरी योग भी है। यह बात सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताई। मिश्र के अनुसार यह योग सुख समृद्धि और शांति लेकर आएगा।
बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि सूर्योदय कर्क राशि में और मेष लगन में हो रहा है। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। मेष लगन का स्वामी मंगल है। चंद्रमा औषधियों का कारक है। इस दिन चंद्रमा और बृहस्पति के एक साथ होने के कारण गजकेसरी योग बन रहा है। यह योग सुख समृद्धि और शांति प्रदान करता है। कर्क राशि में चंद्रमा और बृहस्पति का योग 12 वर्षों के बाद आ रहा है।
एक साथ मिल रहे हैं चंद्रमा और बृहस्पति
रवि पुष्य योग सुबह 5 बजकर 48 मिनट से दोपहर बाद तीन बजकर 53 मिनट तक है। पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है। कुंडली में सूर्य की महादशा और शनि की अंतरदशा चल रही हो या शनि की महादशा में सूर्य की अंतरदशा चल रही हो।
व्यक्ति बीमार हो शारीरिक कष्ट हो, दवा से लाभ न हो तो सूर्योदय से लेकर 3 बजकर 53 मिनट से पहले दवा लेकर सूर्य और शनि का पाठ कर दवा लें तो बीमारी ठीक होनी शुरू हो जाती है।
देवालय पूजक परिषद चंडीगढ़ के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी लाल बहादुर दुबे और सेक्टर-30 के शिव शक्ति मंदिर के पुजारी श्याम सुंदर शास्त्री के अनुसार ज्योतिष शास्त्र में आयुर्वेद के सिद्धांत के अनुसार नेत्र पीड़ा, वायु पीड़ा हो तो औषधि तैयार कर रोगी को दी जाए तो यह शुभ है।
जय श्री राम ज्योतिष केंद्र सेक्टर-15 के प्रमुख स्वामी राम बहादुर मिश्र ने बताया कि रवि पुष्य योग में यंत्र, तंत्र और मंत्र का प्रयोग भी शुभ है। उच्च शिक्षा ग्रहण करना, या विद्या का प्रारंभ करना, आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करना इस योग में शुभ माना है।