चंडीगढ़ में इस दशहरा 221 फुट का रावण आकर्षण का केंद्र रहेगा। दावा है कि यह विश्व का सबसे बड़ा रावण का पुतला होगा, जिसका दहन दशहरे के दिन किया जाएगा। खास बात यह है कि यह पुतला सिटी ब्यूटीफुल में बन रहा है, इसलिए इसकी साज-सज्जा का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। निर्माणकर्ताओं का कहना है कि सबसे ऊंचा होने के साथ ही यह रावण हैंडसम भी होगा।
फिलहाल रावण के पुतले को बनाने के लिए कारीगर दिनरात जुटे हुए हैं। यह पुतला जब बनकर पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगा तो इसे खड़ा करने के लिए करीब 300 लोगों की जरूरत होगी। रावण के पुतले को खड़ा करने के लिए आठ लोहे के रस्से लगेंगे। रावण के पुतले का वजन करीब 70 क्विंटल होगा। इतने ऊंचे रावण को बनाने पर आनेवाला खर्च शहर की धार्मिक संस्था शिव पार्वती सेवादल उठा रहा है।
रावण के इस पुतले को बनाने वाले अंबाला के गांव बराड़ा निवासी तेजिंदर सिंह चौहान का कहना है कि पुतले का निर्माण अंतिम चरण में है। रावण की साज-सज्जा और कपड़ों पर इस बार विशेष ध्यान रखा जा रहा है। इस बार विशेष रंगों के परिधान में रावण को सजाया जाएगा। इसके लिए तीन हजार मीटर कपड़ा लगेगा।
2500 मीटर जूट के मैट का प्रयोग होने के साथ ही 24 फुट के 500 बांस लगेंगे। चौहान ने बताया कि रावण का चेहरा फाइबर ग्लास का बनाया जा रहा है। रावण के चेहरे का वजन ही साढ़े तीन क्विंटल है। जबकि तलवार 55 फुट की, जूते 40 फुट के और मुकुट की ऊंचाई 70 फुट होगी।
बता दें कि तेजिंदर चौहान ने 1987 में उन्होंने अपने पिता अमी सिंह से प्रेरित होकर सबसे पहले महज 20 फुट ऊंचा रावण तैयार किया था। तब से ये सिलसिला बदस्तूर जारी है। अभी तक वह अम्बाला के बराड़ा में रावण का पुतला तैयार कर रहे थे। लेकिन प्रशासनिक आपत्ति के बाद उन्होंने ट्राईसिटी का रुख किया।
रावण के पुतले की ऊंचाई और पब्लिक की संख्या अधिक होने के कारण किसी अप्रिय घटना के मद्देनजर बराड़ा प्रशासन ने वहां रावण का पुतला तैयार करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उन्होंने पंचकूला स्थित माता मनसा देवी मंदिर प्रबंधक कमेटी से संपर्क किया और यहां देश का सबसे ऊंचा रावण तैयार किया।
इसबार वे धनास में पुतला बना रहे हैं। वहीं पुतले बनाने के लिए तेजिंदर अब तक अपनी साढ़े 12 एकड़ जमीन बेच चुके हैं। रावण बनाने के लिए तेजिंदर का नाम अब तक पांच बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज हो चुका है। तेजिंदर ने बताया कि 2011 में 175 फुट ऊंचा पुतला बनाकर पहली बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज करवाया था।
इसके बाद 2012 में 180 फुट ऊंचा रावण बनाया, लेकिन किसी कारण वश रिकॉर्ड के लिए दावा नहीं कर पाए। 2013 में 185 फीट रावण तैयार कर अपना रिकॉर्ड तोड़ दूसरी बार लिमका बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराया। 2014 में 190 फुट, 2015 में 200 फुट, 2016 में 210 फुट ऊंचा रावण तैयार कर लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज करवाया।
रीमोट कंट्रोल से जलेगा रावण, रीमोट के 20 प्वाइंट होंगे..
तेजिंदर सिंह चौहान ने बताया कि रावण के पुतले का दहन रिमोट कंट्रोल से किया जाएगा। इसके लिए 20 प्वाइंट बनाए जाएंगे। सबसे पहले छत्र में ब्लास्ट होगा। उसके बाद मुकुट और फिर पास में ही राजहंस में ब्लास्ट होंगे। इसके बाद रावण के बायीं और दायीं ओर ब्लास्ट होगा। इसके बाद चेहरे में ब्लास्ट होगा। चेहरे के बाद तलवार और नाभी में ब्लास्ट होगा। इसके बाद जूते में चार प्वाइंट लगाए गए हैं। जूते से ऊपर की ओर ब्लास्ट होगा और इस प्रकार पूर्ण होगा रावण का अंत।
दहन के लिए विशेष प्रकार के पटाखे मंगाए, 80 प्रतिशत कम होगा प्रदूषण
राणा तेजिंदर सिंह चौहान ने बताया कि करीब एक क्विंटल पटाखे पुतले में रखे जाएंगे। उन्होंने कहा कि कोई भी चीज जलेगी तो प्रदूषण तो होगा लेकिन यह विशेष प्रकार के पटाखे तमिलनाडु के शिवगंगा से मंगाए जा रहे हैं जो अन्य पटाखों के मुकाबले 80 प्रतिशत कम प्रदूषण फैलाएंगे।
बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं रावण देखने
चौहान ने बताया कि हर शाम लोग रावण के बन रहे पुतले को देखने के लिए यहां बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। अधिक लोगों के पहुंचने से पुतले को नुकसान न हो इसके लिए बेरिकेड लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि इतने बड़े रावण को देखने के लिए लोगों में काफी क्रेज है।