गर्मी में बिजली कट से परेशान होने वाले चंडीगढ़ के पूर्वी इलाके के लोगों को जल्द राहत मिलने वाली है। हल्लोमाजरा में 220 केवी का सब स्टेशन बनकर तैयार हो गया है। यूटी प्रशासन ने ट्रायल भी शुरू कर दिया है। एक से दो हफ्ते में ट्रायल के पूरा होने पर इसी महीने इसका उद्घाटन कर दिया जाएगा। सब स्टेशन के तैयार होने से लाखों लोगों को लाभ मिलेगा।
बिजली कट से मिलेगा छुटकारा
220 केवी के सब स्टेशन का काम पूरा होने के साथ बिजली का एक अतिरिक्त स्त्रोत मिल गया है, जिससे 80 मेगावाट के करीब लोड कम होगा और अधिक बिजली कट से छुटकारा मिलेगा। इस सब स्टेशन को 350 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया है। यहां से खासकर डिवीजन नंबर-5 में बिजली की आपूर्ति की जाएगी। प्रोजेक्ट के तहत सब स्टेशन पर आगे 66-66 केवी दो फीडर्स लगाए गए हैं, जिससे शहर के अलग-अलग इलाकों में बिजली की आपूर्ति की जाएगी।
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दो करोड़ रुपये से फीडर्स लगाने का काम हाल ही में प्रशासन ने पूरा किया है। वर्ष 2020 में पावर ग्रिड के सहयोग से प्रोजेक्ट का काम शुरू किया गया था लेकिन पंजाब में सब स्टेशन लाइन के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर कुछ दिक्कत आ रही थी। अधिग्रहण का काम पूरा होने के बाद प्रोजेक्ट पर आगे काम शुरू हो सका। नया सब स्टेशन बनने से इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1, 2, सेक्टर-29, 31, 47, 48, राम दरबार, गांव फैदां, हल्लोमाजरा, बहलाना, रायपुर कलां, मक्खन माजरा और दड़वा आदि के लोगों को सीधा लाभ होगा।
अन्य सब स्टेशन का लोड होगा कम
चंडीगढ़ खुद बिजली पैदा नहीं करता है। बाहर से बिजली खरीदकर घरों में सप्लाई करता है। शहर में तीन जगहों से बिजली आ रहीं हैं, जिसमें एक तो 220 केवी सब स्टेशन मोहाली, 220 केवी सब स्टेशन किशनगढ़ और 66केवी स्टेशन बीबीएमबी शामिल हैं। बिजली को घरों तक पहुंचाने के लिए इसके लिए 66 केवी के 14 सब स्टेशन व 33केवी के 5 सब स्टेशन हैं।
अब इस नए सब स्टेशन के शुरू होने से मोहाली व किशनगढ़ सब स्टेशन का लोड कम हो जाएगा। अगर इन दोनों सब स्टेशनों पर कोई खराबी भी आती है तो प्रशासन के पास अब अतिरिक्त स्त्रोत है, जिससे बिजली की आपूर्ति की जाएगी। बता दें कि शहर में वार्षिक 150 करोड़ यूनिट बिजली की खपत है, जबकि 800 से 900 रुपये करोड़ वार्षिक राजस्व प्राप्त हो रहा है, जिसे केंद्र सरकार के कंसोलिडेटेड फंड में जमा करवाया जाता है।
सर्दियों में 170, गर्मी में 400 मेगावाट तक पहुंच जाती है मांग
विभाग की तरफ से दावा किया जाता है कि उनके पास 500 मेगावाट बिजली उपलब्ध है। मिनिस्ट्री पावर की तरफ से इसमें 305 मेगावाट आवंटित हैं जबकि 200 मेगावाट बिना आवंटित कोटा है। हालांकि केंद्र की तरफ से ही जरुरत के मुताबिक ये कोटा जारी किया जाता है। इसके अलावा फॉल्ट आदि व सभी स्टेशनों के एक साथ चालू न होने के कारण भी ये कोटा पूरा नहीं हो पाता है।
जून व जुलाई में 400 मेगावाट से ऊपर बिजली की डिमांड पहुंच जाती है, जिस समय विभाग को बिजली की कमी का सामना करना पड़ता है और इस कारण लोगों को भी बिजली के अघोषित कट झेलने पड़ते हैं। सर्दियों में 170 मेगावाट के करीब डिमांड रहती है। इसके अलावा अगर बिजली के अधिक गैप का सामना करना पड़ता है तो विभाग एक्सचेंज से भी बिजली खरीदता है।