दान में दी गई 2000 आंखों को कचरे के डिब्बे में फेंक देने का मामला सामने आया है। मामला लोकसभा में उठाया गया। देश के चार बड़ें संस्थानों में ऐसा काम हुआ है। ये चार बड़े संस्थान हैं एम्स नई दिल्ली, पीजीआई चंडीगढ़ व पीजीआई रोहतक।
इन संस्थानों ने बीते पांच साल के दौरान दान की गई 2000 आंखों को कूड़े के डिब्बों में डालने का काम किया गया। यह जानकारी आरटीआई के जरिए मिली है। इनेलो संसदीय दल के नेता दुष्यंत चौटाला ने लोकसभा में देश के चार बड़े संस्थानों की ओर से लोगों की दान की गई आंखें कचरे में फेंकने का मुद्दा उठाया।
उन्होंने सरकार से मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाने की मांग करते हुए कहा कि एक तरफ देश में नेत्रदान को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आरटीआई के हवाले से सामने आई यह सूचना बेहद चिंताजनक है। इनेलो सांसद ने कहा कि इसके चलते जिन दो हजार दृष्टिहीनों को रोशनी दी जा सकती थी, उनसे यह अधिकार छीन लिया गया।
उन्होंने कहा कि इनेलो के छात्र संगठन ने इस मुहिम को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2013 में एक कैंप लगाया था, जिसमें आठ घंटे के दौरान 10 हजार 540 आंखें दान करके एक नया कीर्तिमान स्थापित किया गया। इससे साफ है कि वे नेत्रदान की मुहिम को बढ़ावा देना चाहते हैं और इस बीच ऐसी लापरवाही बेहद निंदनीय है।
विदेशी कंपनियां भी करें फसलों का बीमा
दुष्यंत चौटाला ने लोकसभा में बीमा क्षेत्र में एफडीआई बढ़ाने को लेकर पेश बिल पर चर्चा के दौरान वित्त मंत्री से आग्रह किया कि वे सुनिश्चित करें कि जो विदेशी कंपनियां भारत में बीमा क्षेत्र में निवेश करें, उनके लिए सस्ती दरों पर किसानों की फसलों का बीमा करना जरूरी किया जाए।
उन्होंने कहा कि बीमा क्षेत्र में निजी कंपनियों के मुकाबले सरकारी कंपनी एलआईसी का कामकाज कहीं बेहतर है और निजी कंपनियों की करीब 800 ब्रांचें बंद भी हो गई हैं।
उन्होंने कहा कि विदेशों में जहां किसानों की प्रत्येक एकड़ भूमि का बीमा होता है, वहीं भारत में किसानों की फसलों का सस्ती दरों पर बीमा सुनिश्चित किया जाना बेहद जरूरी है।
हरियाणा को कोयला खदान देने की मांग
सांसद दुष्यंत चौटाला ने संसद में हरियाणा में कोयले की कमी से ताप बिजली घर बंद होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को कोयले की कमी के चलते पावर प्लांट बंद न करने पड़े, इसलिए केंद्र सरकार राज्यों को कोयला खादान आवंटन में प्राथमिकता दे।
दुष्यंत ने कोल माइन्स स्पेशल प्रोविजन बिल पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि बिजली व स्टील क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कोयले की सख्त जरूरत है।
उन्होंने हरियाणा के पावर प्लांट का उदाहरण देते हुए कहा कि प्रदेश में पिछले दिनों पावर प्लांटों की 12 यूनिट में से नौ यूनिट इसलिए बंद थी कि उनके लिए समुचित मात्रा में कोयला की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं कर पाए थे। केंद्र सरकार सुश्चित करे कि कोयले की वजह से प्रदेशों में बिजली उत्पादन प्रभावित न हो।