चंडीगढ़ में बिल्डिंग वायलेशन, पेड़ काटने और बिना अनुमति विज्ञापन लगाने वालों को अब भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। केंद्रीय कानून मंत्रालय ने ‘कैपिटल ऑफ पंजाब (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट-1952’ की धाराओं 13, 14 और 15 में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इन उल्लंघनों पर लगने वाला जुर्माना 500 रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये तक कर दिया गया है। यानी जुर्माने की राशि में करीब 200 गुना बढ़ोतरी की गई है।
धारा-13 उन मामलों से संबंधित है, जब कोई व्यक्ति एक्ट की धारा 4 (2) या धारा 6 के अंतर्गत दिए गए निर्देशों का उल्लंघन करता है। ये सभी बिल्डिंग बायलेशन से जुड़े हुए हैं। वर्तमान व्यवस्था में ऐसे उल्लंघन पर अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना और यदि उल्लंघन लगातार जारी रहता है तो प्रत्येक दिन के लिए 20 रुपये अतिरिक्त जुर्माने का प्रावधान है। अब यह राशि बढ़ाकर एक लाख रुपये तो कर ही दी, साथ ही लगातार उल्लंघन पर प्रतिदिन 4,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा। यह प्रावधान जोड़ा गया है कि कुल दंड संपत्ति के मूल्य (कलेक्टर रेट के अनुसार) के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
प्रशासन ने वर्ष 2022 में इस संबंध में प्रस्ताव भेजा था। ढाई साल से इस पर मंथन चल रहा था। प्रशासन से कई बार जवाब भी मांगे गए और अब कानून मंत्रालय ने एक्ट की धारा 13, 14 और 15 में संशोधन को मंजूरी दे दी हैं। इस स्वीकृति के बाद अब ये संशोधन जल्द ही संसद में पेश किए जाएंगे, जहां से पास होते ही लागू कर दिए जाएंगे।
पेड़ों को काटने, इधर-उधर विज्ञापन लगाने वालों पर भी लगेगी लगाम
धारा 14 : इसका संबंध वृक्ष संरक्षण आदेश और विज्ञापन नियंत्रण आदेश के उल्लंघन से है। पहले इसमें उल्लंघन पर अधिकतम 500 रुपये और लगातार उल्लंघन पर प्रतिदिन 20 रुपये तक का दंड था। इसमें अधिकतम जुर्माना एक लाख रुपये और प्रतिदिन 4,000 रुपये का जुर्माना लगेगा। यहां भी दंड की अधिकतम सीमा संपत्ति के कुल मूल्य के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी। इस धारा का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण और शहरी सौंदर्य को बनाए रखना है।
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धारा 15 : जब कोई व्यक्ति एक्ट के अंतर्गत बनाए गए नियमों का उल्लंघन करता है तो यह राशि भी 500 से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, अदालत को यह अधिकार भी रहेगा कि वह संबंधित संपत्ति या उसके किसी भाग को जब्त करने का आदेश दे सके। यह भी जोड़ा गया है कि कुल जुर्माना संपत्ति के मूल्य के 20 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा।
अभी गंभीर और मामूली उल्लंघनों के बीच नहीं था कोई स्पष्ट अंतर
अब तक बिल्डिंग नियमों के उल्लंघन पर एक जैसी जुर्माने की व्यवस्था थी। गंभीर और मामूली उल्लंघनों के बीच कोई स्पष्ट अंतर नहीं था। संशोधनों के बाद अब व्यावसायिक, रिहायशी या अन्य प्रकार की संपत्तियों में हुए उल्लंघनों पर अलग-अलग दंड तय किए जा सकेंगे। इससे कानून का पालन न करने वालों पर सीधा असर पड़ेगा और भारी जुर्माना भी चुकाना पड़ेगा। प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि संशोधन का उद्देश्य न केवल अवैध निर्माण पर लगाम लगाना है बल्कि चंडीगढ़ जैसे नियोजित शहर में निर्माण कार्यों के लिए एक अनुशासित और टिकाऊ ढांचा तैयार करना भी है।