चंडीगढ़ में तूफान से तोतों की मौत।
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चंडीगढ़ में शनिवार रात 100 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से आए तूफान ने परिंदों पर भी कहर बरपाया। इस तूफान में 200 तोतों और 65 कबूतरों की मौत हो गई। चंडीगढ़ में पहली बार हुई इस तरह की घटना से हर कोई हैरान है। विशेषज्ञों का कहना है कि मासूम परिंदे तूफान की तेज गति का सामना नहीं कर पाए और जिंदगी से हाथ धो बैठे।
रविवार सुबह सैर करने निकले लोगों की आंखों के सामने तूफान से तबाही के मंजर थे। सेक्टर 37 डी स्थित एक पेड़ के नीचे बहुत से पक्षियों को पड़े देख चौंक गए। इनमें से ज्यादातर पक्षी दम तोड़ चुके थे जबकि कुछ घायल थे। घायल पक्षियों को कुछ लोग इलाज के लिए अपने साथ ले गए। इसकी सूचना बर्ड एंबुलेंस के नाम से मशहूर प्रिंस मेहरा को मिली तो वह भी फौरन मौके पर पहुंच गए।
उन्होंने बताया कि करीब 150 तोते मृत मिले हैं जबकि 50 तोतों को सुबह कूड़ा उठाने वाली गाड़ी ले गई। प्रिंस मेहरा का कहना था कि ये तोते और कबूतर इसी पेड़ पर रहते थे। तेज गति से हवा चलने से तोते सोते वक्त नीचे गिरे और उनकी मौत हो गई। पर्यावरण विभाग की वाइल्ड लाइफ टीम ने शहर के अन्य इलाकों का दौरा भी किया लेकिन बाकी जगह ऐसा कुछ नहीं मिला।
पहली बार हुई इतने परिंदों की मौत
यह पहली बार है, जब एक जगह इतनी संख्या में मृत पक्षी पाए गए हों। इनकी मौत का कारण हवा की तेज गति रही है। जब हवा पेड़ से टकराई होगी तो पक्षी उस वक्त सो रहे होंगे। कुछ ने उड़ने की कोशिश की होगी, लेकिन वे जमीन पर गिरे और उनकी मौत हो गई।
-डॉ. रविंदर यादव, एसपीसीए चंडीगढ़
क्या कहते हैं अधिकारी
हवा की तेज गति चलने से पक्षियों की मौत हुई है। हमने यह भी जानने की कोशिश की कि कहीं बिजली का करंट तो नहीं आया था, लेकिन जांच में ऐसा नहीं मिला।
-देवेंद्र दलाई, मुख्य वन सरंक्षक पर्यावरण विभाग चंडीगढ़