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Chandigarh News: 200 करोड़ दे दिए, अब बहाना नहीं... लोगों के काम जमीन पर दिखने चाहिए

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चंडीगढ़। शहर की बुनियादी सुविधाओं को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन अब सख्त मोड में नजर आ रहा है। हल्लोमाजरा में सोमवार को समाधान शिविर में प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने नगर निगम को दो टूक संदेश देते हुए कहा कि 200 करोड़ रुपये अलग से दे दिए हैं, अब बहाने नहीं चलेंगे, लोगों के काम जमीन पर दिखने चाहिए। प्रशासक के इस बयान को सीधे तौर पर नगर निगम और मेयर के लिए जवाबदेही तय करने के रूप में देखा जा रहा है।
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शिविर के दौरान स्थानीय लोगों ने कम्युनिटी सेंटर की कमी का मुद्दा जोरदार तरीके से उठाया। इस पर प्रशासक ने तत्काल जमीन चिह्नित कर प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। इसके साथ उन्होंने बड़ा एलान करते हुए कहा कि किसी की भी मृत्यु या अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रमों के लिए कम्युनिटी सेंटर की सुविधा निशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी ताकि आम लोगों पर आर्थिक बोझ न पड़े। शिविर में लोगों ने नक्शा नियमों में छूट, लैंड पूलिंग, गलत बिलिंग और सीवरेज समस्याओं जैसे मुद्दे उठाए। एक शिकायत पर प्रशासक ने साफ कहा कि केवल शिकायत देने से काम नहीं चलेगा, लोगों को अपने काम के लिए प्रशासन को लगातार फॉलोअप करना होगा।
हल्लोमाजरा में 1.50 एकड़ में बनेगा सीनियर सेकेंडरी स्कूल
स्थानीय निवासी अरविंद सिंह और नरेश कुमार पंचाल ने समाधान शिविर में प्रशासक के समक्ष बताया कि हल्लोमाजरा में पिछले पांच वर्षों से स्कूल टीन-शेड के कच्चे ढांचे में चल रहा है। नौवीं और दसवीं कक्षा के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए कॉलोनी नंबर-4 के स्कूल जाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लंबे समय से नए स्कूल की मांग की जा रही है। इस पर चीफ इंजीनियर सीबी ओझा ने जानकारी दी कि हल्लोमाजरा में 1.50 एकड़ भूमि पर नए सीनियर सेकेंडरी स्कूल के निर्माण के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है और अगले एक वर्ष के भीतर काम शुरू कर दिया जाएगा। शिक्षा सचिव प्रेरण पुरी ने बताया कि मौजूदा टीन-शेड और उससे जुड़े मैदान की जमीन कॉमर्शियल साइट में आने के कारण संपर्क केंद्र के पास नई जगह तय की गई है। जमीन की पहचान पूरी हो चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होगा। उन्होंने यह भी बताया कि क्षेत्र की डिस्पेंसरी को अपग्रेड करने पर 4 करोड़ रुपये खर्च होंगे और यह कार्य तीन महीने में शुरू होगा। साथ ही 92 नई स्ट्रीट लाइटें लगाई जाएंगी और सीवरेज मरम्मत पर 2.86 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। गौरतलब है कि 2008 से छात्र अस्थायी ढांचे में पढ़ने को मजबूर थे।
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शामलात जमीन पर एक महीने में बनेगी नीति
समाधान शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने शामलात जमीन का मुद्दा उठाया। स्थानीय निवासी कुलदीप सिंह ने कहा कि गांवों की शामलात जमीन पर गांववासियों का अधिकार होना चाहिए और इन जमीनों का उपयोग गांव के विकास कार्यों के लिए किया जाना चाहिए। इस पर डीसी निशांत कुमार यादव ने प्रशासक को बताया कि शामलात जमीनों का मामला फिलहाल लंबित है क्योंकि गांव अब नगर निगम के अधीन आ चुके हैं, जबकि पहले ये जमीनें पंचायतों के अधिकार क्षेत्र में थीं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस विषय पर नई नीति बनाकर अगले एक महीने के भीतर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा।
समाधान शिविर में उठे प्रमुख मुद्दे
राजिंदर पाल ने मांग रखी कि 22 गांवों में 100 गज तक के प्लॉट पर नक्शा पास कराने की अनिवार्यता समाप्त की जाए क्योंकि लोगों ने अपनी जरूरत और उपलब्ध स्थान के अनुसार निर्माण कर रखा है।
दीप सिंह ने लैंड पूलिंग का मुद्दा उठाया। इस पर प्रशासक ने कहा कि लैंड पूलिंग के लिए सभी हितधारकों का एकजुट होना जरूरी है तभी कोई व्यावहारिक नीति बनाकर बीच का रास्ता निकाला जा सकता है।
राहुल भोला ने हल्लोमाजरा के दीप कॉम्पलेक्स में रिहायशी क्षेत्र पर कॉमर्शियल दर से पानी का बिल आने की शिकायत की। इस पर नगर निगम अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह क्षेत्र लाल डोरा के बाहर आता है, इसलिए नियमानुसार कॉमर्शियल दरें लागू की जा रही हैं।
प्रभजोत कौर ने बताया कि उनके घर के सामने पिछले चार वर्षों से सीवरेज का पानी जमा हो रहा है। 14 अप्रैल 2025 को शिकायत के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ। इस पर प्रशासक ने कहा कि जनता को अपने काम के लिए लगातार फॉलोअप करना होगा और अधिकारियों को जवाबदेह बनाना होगा।
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