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लावारिस पशु बना रहे काल: तीन साल में 200 हादसे, 12 मौतें, किसी ने पति खोया तो किसी ने लाल

Thu, 03 Mar 2022 04:21 PM IST
ajay kumar दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला (हरियाणा)

सार

लावारिस पशुओं ने अभी तक पता ही नहीं कितने घरों के चिराग बुझा दिए हैं और कितने इनके शिकार का दंश झेल रहे हैं। इनमें कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनके घरों को लावारिस पशुओं ने बेसहारा बना दिया है। आज वह गुजर बसर करने के लिए दर बदर भटक रहे हैं। 
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लावारिस पशु - फोटो : फाइल
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विस्तार
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पंचकूला को लावारिस पशुओं से मुक्त करने के लिए जिले में 11 गोशालाओं का संचालन हो रहा है। इसके बाद भी सड़कों पर करीब 4555 पशु यमदूत बनकर घूम रहे हैं। इनकी वजह से वर्ष 2019 से 2022 के बीच में 12 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 40 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। 

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200 से अधिक जिले में हादसे हो चुके हैं। जिसमें लोग तो बच गए लेकिन उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा। जिले में सबसे ज्यादा हादसे पंचकूला-यमुनानगर और कालका-शिमला नेशनल हाईवे पर हो रहे हैं। स्थिति यह है कि पंचकूला में प्रति माह लावारिस पशुओं से दो से तीन हादसे होते हैं। 

यही कारण है कि पशुओं से होने वाले हादसों में जिला नंबर एक पर है। नगर निगम पिछले पांच साल से दावा कर रहा है कि शहर को जल्द लावारिस पशुओं से मुक्त बनाया जाएगा। इसके लिए निगम ने करोड़ों की लागत से गोशाला और नंदीशाला बनाने में खर्च किए हैं। इसके बाद जिले के लोगों की सड़क के यमदूतों राहत नहीं मिल रही है। 
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वर्ष 2021 में शहर में लावारिस पशुओं की संख्या करीब 1700 थी, जबकि वर्ष 2019 में करीब 803 थी। जिले के गोशाला संचालकों का दावा है कि उन्होंने बड़ी संख्या में लावारिस पशुओं को जगह दी है। सुखदर्शनपुर में करीब 5.6 करोड़ की लागत गोशाला का निर्माण किया गया। इसमें करीब 700 पशु हैं। श्री माता मनसा देवी गोशाला में 1200 पशु हैं।  

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निगम कर रहा नंदीशाला के निर्माण की तैयारी
शहरवासियों को लावारिस पशुओं की समस्या से निजात दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। नगर निगम की टीम प्रतिदिन सड़क पर घूमने वाले चार से पांच पशुओं को पकड़ कर गोशालाओं में पहुंचा रही है। करीब ढाई करोड़ की लागत से गांव कोट में नंदीशाला का निर्माण करवाया जा रहा है, जिसमें करीब 1200 पशुओं का रखा जा सकेगा। इसके शहर के अंदर और सड़क किनारे डेयरी का संचालन करने वालों को भी एक जगह शिफ्ट किया जाएगा।  - कुलभूषण गोयल, मेयर, पंचकूला

किसी के सिर से पिता का साया उठा, कोई रोटी के लिए मोहताज
लावारिस पशुओं ने अभी तक पता ही नहीं कितने घरों के चिराग बुझा दिए हैं और कितने इनके शिकार का दंश झेल रहे हैं। इनमें कुछ परिवार ऐसे भी हैं जिनके घरों को लावारिस पशुओं ने बेसहारा बना दिया है। आज वह गुजर बसर करने के लिए दर बदर भटक रहे हैं। 

तीन सांड़ों ने किया हमला, दो माह बिस्तर पर पड़ी रही 
डेढ़ साल पहले सब्जी लेकर घर लौटते समय तीन सांड़ों ने हमला कर दिया। इस दौरान काफी चोटें आईं। दाहिना हाथ और अंगूठा टूट गया। करीब एक माह तक बिस्तर पर पड़ी रहीं। लॉकडाउन में बेटे की नौकरी चली गई। उस समय घर में कोई कमाने वाला नहीं था। आसपास के लोगों ने राशन देकर मदद की, जिससे दो वक्त की रोटी मिली। अब कुछ स्थिति में सुधार हुआ है। सड़क किनारे दुकान लगाकर अपना और अपने बेटे का पेट पाल रही हूं।  -जानकी, सेक्टर-19, पंचकूला 

पशुओं ने बच्चों के सिर से पिता का साया छीना

करीब चार साल पहले गांव बुढ़नपुर में सांड़ों ने दो बच्चों से उसके पिता का साया छीन लिया। दोनों आज दो वक्त की रोटी के लिए अपनी मां के साथ सड़कों पर भटक रहे हैं। रसाली ने बताया कि उसके पति परवाना पर करीब चार साल पहले बुढ़नपुर गांव में लावारिस पशुओं ने हमला कर दिया था। जिसके चलते मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी। घर में कमाने वाले वही थे। आज वह खुद सड़क किनारे लोहे का सामान बेचकर अपने बच्चों का गुजर बसर करती हैं। हादसे के बाद कुछ पैसे निगम की ओर से मिले थे लेकिन आज स्थिति बिगड़ गई है। 

इनकी जिंदगी छीन ली...
31 जनवरी को वार्ड नंबर- 20 के गांव जलौली निवासी दीपक (30) की मोटरसाइकिल के आगे लावारिस पशु आ जाने से हुई घटना में मृत्यु हो गई थी। दीपक के परिजन हुकम सिंह और प्रताप सिंह ने बताया कि न तो नगर निगम की ओर से और न ही जिला प्रशासन की ओर से किसी भी तरह की कोई सहायता दी गई है। 
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