पंजाब विश्वविद्यालय व उससे संबद्ध कॉलेजों के 20 फीसदी स्टूडेंट्स के पास ऑनलाइन पढ़ाई नहीं पहुंच पा रही है। शिक्षक इसके लिए जुटे जरूर हैं, लेकिन विद्यार्थी नेट आदि के दायरे में नहीं आ पा रहे हैं। पीयू अब इसके लिए कोई दूसरा रास्ता निकालने की तैयारी कर रहा है। यदि पंजाब, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा आदि राज्यों के ये विद्यार्थी वंचित रहे तो फिर इनके एग्जाम कराने में दिक्कतें आएंगी। इनकी पढ़ाई ऑनलाइन होगी नहीं और लॉकडाउन लगातार चलता रहेगा तो क्लास वर्क होगा नहीं। हालांकि रास्ते निकालने की तैयारियां तेजी से चल रही हैं।
20 मार्च से पंजाब विश्वविद्यालय बंद चल रहा है। 45 दिन से विद्यार्थी अपने घरों पर हैं। यह समय विद्यार्थियों के एग्जाम करवाने का होता है, लेकिन लॉकडाउन के कारण नहीं हो पा रहा है। अब तक कोर्स भी पूरा नहीं हुआ है, क्योंकि कक्षाएं लगाई ही नहीं गईं। यूजीसी के आदेश के बाद हर विश्वविद्यालय की ओर से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू की गईं। पीयू ने भी तैयारी की और पढ़ाना शुरू किया, लेकिन शुरुआत में ऑनलाइन पढ़ाई की जानकारी अधिकांश शिक्षकों के पास नहीं थी। उनके लिए प्रशिक्षण आदि आयोजित किए गए और समस्या हल होती गई।
आज स्थिति यह है कि पीयू के 80 फीसदी शिक्षक ऑनलाइन पढ़ाई करवा रहे हैं। 20 फीसदी शिक्षकों के पास भी पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। हालांकि वे वाट्सएप और अन्य साधनों के जरिये विद्यार्थियों तक नोट्स पहुंचाने की कोशिश में लगे हैं। 20 फीसदी स्टूडेंट ऐसे हैं जो ऑनलाइन पढ़ाई का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उनको पढ़ाई की चिंता भी है। उन्होंने किसी न किसी माध्यम से पीयू के अधिकारियों तक यह बात पहुंचाई। अब पीयू उनके लिए रास्ते निकालने की तैयारी कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि इन विद्यार्थियों के पास नेट की सुविधा नहीं है।
उन्होंने 50 से 100 रुपये तक का रिचार्ज मोबाइल में करवाया है, जिसकी स्पीड कम है या नेट का डाटा कम होने के कारण कक्षाएं अटैंड नहीं कर पाते। जानकारों का कहना है कि यदि इन विद्यार्थियों का डाटा एकत्रित करके सभी के मोबाइल पीयू की ओर से रिचार्ज करवा दिए जाएं तो कुछ बात बन सकती है और अधिक खर्च भी नहीं होगा। हालांकि पीयू कोई न कोई रास्ता इसी सप्ताह में निकाल लेगा।
यूजीसी ने सभी विश्वविद्यालयों से जाना पढ़ाई का हाल
लॉकडाउन के दौरान यूजीसी ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर गंभीर है। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से ऑनलाइन पढ़ाई का हाल जाना है। जिन विश्वविद्यालयों की गति धीमी मिली है उन्हें जल्द से जल्द पढ़ाई की रफ्तार तेज करने को कहा है ताकि सिलेबस समय पर पूरा हो जाए। जैसे ही लॉकडाउन खुलेगा तो परीक्षाएं आदि आयोजित की जा सकेंगी।