यूटी विजिलेंस द्वारा दो हजार रुपये वसूली करते रंगे हाथ पकड़े गए नगर निगम कर्मचारी सुखदेव सिंह को जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने दो साल की सजा सुनाई है। साथ ही उस पर तीन हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है। सुखदेव नगर निगम के पब्लिक हेल्थ विंग में बतौर बेलदार काम करता था। विजिलेंस ने 25 जून, 2013 को उसके खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम और वसूली की धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
नया गांव स्थित गोविंद नगर के मदन लाल ने विजिलेंस को दी शिकायत में कहा था कि वह इन्वायरोक्यूर प्रोजेक्ट्स (प्रा.) लिमिटेड हेल्थकेयर इंफोस में बतौर ऑपरेटर काम कर रहा है। कंपनी में फरवरी 2013 में ट्यूबवेल और बूस्टर ऑपरेटर की कुछ पोस्ट निकलीं थी। इसे लेकर उसने अपने सर्टिफिकेट्स कंपनी में जमा करवाए थे। कुछ दिन बाद सुखदेव सिंह नामक व्यक्ति का फोन आया और उसने कहा कि वह कंपनी में सुपरवाइजर है।
इसके बाद उसने मदन लाल को कजेहड़ी के सरकारी स्कूल के पास बूस्टर पर ड्यूटी ज्वाइन करने को कहा। 6 मार्च, 2013 को शिकायतकर्ता ने ड्यूटी ज्वाइन कर ली। अप्रैल में सुखदेव ने शिकायतकर्ता को सेक्टर-35 स्थित कंपनी ऑफिस में बुलाया। यहां उसके अलावा कुछ अन्य लोगों से सुखदेव ने बैंक खाता खुलवाने की बात कहते हुए कुछ कागजों पर साइन करवाए।
यहां ठेकेदार ने सभी से कहा कि उन्हें बतौर सैलरी पहले सात हजार रुपये का चेक मिलेगा। इसमें से उन्हें 1500 रुपये उसे या सुखदेव को देने की बात कही। उन्होंने इसका विरोध किया तो उन्होंने नौकरी से निकाल देने की बात कही।
इसके बाद भी सुखदेव उन सब पर पैसे को लेकर दबाव बनाता रहा। एक दिन उसने दो हजार रुपये देने के लिए शिकायतकर्ता को मलोया स्थित पुलिस चौकी के पास ट्यूबवेल पर बुलाया। मदन लाल ने 25 जून, 2013 को इसकी शिकायत विजिलेंस को दी। जांच के बाद शिकायत सही पाए जाने पर टीम ने ट्रैप लगाकर सुखदेव को पैसे लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था।