तलाशी के दौरान अशोक से लोहे का पाइप, विशाल से चाकू और संदीप, सुनील व राहुल से लकड़ी के बिंडे बरामद किए। पुलिस ने दर्ज एफआईआर में लिखा है कि भीड़ ने पेट्रोल बम का प्रयोग कर आगजनी करते हुए सरकारी ड्यूटी में बाधा डाली। इसके चलते आरोपियों को आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 186, 188, 436 व 25, 54 व 59 आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तार किया था।
डीएसपी ने की जांच, आईपीसी की धारा 511 भी जोड़ी
आरोपियों की गिरफ्तार के बाद मामले की जांच पड़ताल में आईपीसी की धारा 353 जोड़ी गई। साथ ही डीएसपी विवेक चौधरी ने पड़ताल की। इसके बाद आगजनी के प्रयास का मामला भी पाया गया। साथ ही पुलिस ने धारा 511 भी केस के अंदर जोड़ दी। तीन साल से जिला अदालत में केस की सुनवाई चली।
पहले मामला एडीजे फखरुद्दीन की अदालत में चल रहा था। बाद में एडीजे रितु वाईके बहल की कोर्ट में केस आ गया। पुलिस अदालत में एफआईआर में दर्ज आरोपियों को साबित नहीं कर सकी। इसके चलते शनिवार को साक्ष्यों के अभाव में सभी आरोपियों को बरी कर दिया।
मामले में पुलिस ने एक युवक से चाकू, एक से लोहे का पाइप व तीन से बिंडों की बरामदगी दर्शाई है, लेकिन जांच टीम कोर्ट में कोई ठोस सबूत नहीं दे सकी। इसके चलते संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। -जितेंद्र हुड्डा, वकील बचाव पक्ष