चंडीगढ़ में बनने वाला सामान दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े राज्यों में जाता है लेकिन यही राज्य कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित थे। नए ऑर्डर नहीं मिल रहे, जो पुराने ऑर्डर थे, कंपनियां वह सामान उठा नहीं रही थीं, क्योंकि आगे मार्केट में डिमांड नहीं थी। रॉ मैटेरियल समय पर नहीं पहुंच रहा था। ट्रांसपोर्टेशन की चिंताएं काफी ज्यादा बढ़ गईं थीं। इससे इंडस्ट्रीज की चेन पूरी तरह से बिगड़ गई।
कामगारों की कमी भी उद्योगपतियों को झेलनी पड़ी, क्योंकि ज्यादातर मजदूर अपने घर की ओर जा चुके थे। यही नहीं, कामगारों को काम पर लेने से पहले उनका कोरोना संक्रमण जांच कराना, जांच का खर्च प्रशासन की ओर से न उठाना, सैनिटाइजर खरीदना, कर्मचारियों को मास्क देना, शारीरिक दूरी के मानक को बनाए रखने के लिए मशीनरी उपकरण शिफ्टिग में समय व पैसे खर्च होने की बंदिशों से भी व्यापारी काफी परेशान हैं।
डिमांड नहीं, इसलिए उत्पादन कम
बाजार में डिमांड नहीं है, इसलिए उत्पादन काफी कम हो गया है। शहर के उद्योगपति बहुत परेशान हैं। इज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग ने भी इसकी पुष्टि की है। उद्योग अब धीरे-धीरे गति पकड़ रहे हैं। - नवीन मंगलानी, प्रेसिडेंट, चैंबर ऑफ चंडीगढ़ इंडस्ट्रीज
बाजार में मांग ही नहीं है
शहर में ऐसी कोई भी फैक्ट्री नहीं है, जिसे कोरोना वायरस की वजह से नुकसान नहीं हुआ हो। बाजार में मांग घटी है, जिसकी वजह से उत्पादन कम है। लोग इन दिनों खर्च करने से बच रहे हैं। लॉकडाउन के पहले से ही शहर के व्यापारी घर बैठे हुए हैं। केंद्र सरकार ने राहत पैकेज का एलान तो किया लेकिन जमीनी स्तर पर उसका कुछ खास लाभ देखने को नहीं मिला। - एमपीएस चावला, प्रेसिडेंट, चंडीगढ़ इंडस्ट्रियल एसोसिएशन