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Chandigarh News: फाइलों में अटका जिले का 1800 करोड़ का राजस्व

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मोहाली। जिले के विकास के लिए राजस्व की कोई कमी नहीं है। अभी जिले में 180 प्रोजेक्ट मंजूर हैं जबकि 2018 में वन टाइम रेगुलराइजेशन पॉलिसी आने के बाद अब तक 1200 प्रोजेक्ट मालिकों ने अपनी कॉलोनियों को रेगुलराइज करने के लिए आवेदन दिया है लेकिन नीतियां सरल नहीं होने और कर्मचारियों की कमी के कारण अब तक यह मंजूर नहीं हो पाए हैं। इस कारण राजस्व के रूप में सरकार को मिलने वाला 1800 करोड़ रुपये फाइलों में अटका पड़ा है। यह बात एसएएस जिला बिल्डर एसोसिएशन के प्रधान ओम प्रकाश ने कही।
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उन्होंने कहा कि सरकार इस तरफ ध्यान देकर जल्द से जल्द नीतियों में सुधार करने के साथ ही कर्मचारियों की नियुक्ति करके कॉलोनियों को मंजूर करे। इससे 1800 करोड़ रुपये की आमदन होगी जिससे सरकार जिले का विकास करवा सकती है। उन्होंने कहा कि अगर नीतियों में सुधार हो जाए तो सरकार को करीब पांच साल से रुके पड़े पैसे तुरंत मिल जाएंगे। ऐसा होने के बाद नई अवैध कॉलोनियों पर लगाम लगेगी। वहीं, लोगों से जमीन के नाम पर हो रही ठगी के मामलों में कमी आएगी। सरकार अगर इस वन टाइम रेगुलराइजेशन स्कीम को लाने के बाद इसे फास्ट्रैक पर आधारित कर मंजूरी देती तो अब तक ये कॉलोनियां मंजूर हो चुकी होतीं और सरकार को राजस्व के रूप में करोड़ों रुपये मिल गए होते। वहीं, अगर अब भी प्रदेश सरकार इस योजना को लागू करने के लिए जोर लगाती है तो इसी साल में ही सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिल जाएगा।

हरियाणा की तर्ज पर कॉलोनियों को मंजूर करने की मांगएसएएस जिला बिल्डर एसोसिएशन के डायरेक्टर रजनीश खन्ना और पंकज सूद, महासचिव नरेश खन्ना, संरक्षक हरमिंदर सिंह मावी, वरिष्ठ उपप्रधान विक्की लांबा और सदस्य नवीन पुरी ने कहा कि हरियाणा की सरकार की नीतियां सरल हैं। उन्होंने अभी 900 कॉलोनियां एक दिन में रेगुलराइज कर दी हैं। इससे जनता के साथ-साथ हरियाणा सरकार को राजस्व का लाभ हुआ है। उन्होंने प्रदेश सरकार से हरियाणा की तर्ज पर अवैध कॉलोनियों को नियमित करने की मांग है। साथ ही सुझाव दिया है कि इंवेस्ट पंजाब की तरह हर जिले में एक रेगुलराइजेशन मेला लगाकर एक ही छत के नीचे सभी विभागों के अधिकारियों को तैनात कर कॉलोनियों को रेगुलर किया जाए।
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