प्रमोशन देकर लेक्चरर से प्रिंसिपल बनाकर सरकारी कॉलेजों में ज्वाइन करवाए गए 17 लोगों को डिमोट कर दिया गया है। हाईकोर्ट में डाली गई सिविल रिट के तहत पंजाब सरकार अपना पक्ष रखने में असफल रही है। अब पंजाब के 17 सरकारी कॉलेजों के प्रिंसिपल दोबारा से वापस पुरानी जगह पर लेक्चरर की सेवाएं ही निभाएंगे। एजुकेशन सचिव वाईके मीना की और जारी रिपोर्ट की कॉपी पंजाब के फाइनेंस विभाग को भी भेजी गई, जहां से प्रिंसिपल बनकर छह महीने तक उस पद का लाभ लेने वालों से उसकी रिकवरी भी की जा सकी।
बतौर प्रिंसिपल 27 मार्च 2018 को प्रमोट हुए 17 लेक्चरर पर सिविल रिट पिटीशन पर हाईकोर्ट ने 24 अगस्त 2018 को इस संबंधी आदेश जारी कर दिया था। हाईकोर्ट के इस आदेश पर बतौर प्रिंसिपल प्रमोट हुए लेक्चरारों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाया लेकिन वहां से स्टे न मिलने और अगली तारीख अक्तूबर में पड़ने की सूचना है।
अक्तूबर में इस केस की अगली तारीख पड़ने के बाद ही शुक्रवार को एजुकेशन सचिव वाईके मीना ने सभी प्रिंसिपल को दोबारा अपनी-अपनी जगहों पर ज्वाइन करने संबंधी नोटिस जारी किया। शनिवार को कुछ प्रिंसिपल वापस बतौर लेक्चरर ज्वाइन करने वाले हैं जबकि कुछ सुप्रीम कोर्ट के सुनवाई की अगली तारीख तक छुट्टी पर जाने का मन बनाकर बैठे हैं।
ये प्रिंसिपल होंगे डिमोट
हाईकोर्ट के आदेश पर डिमोट होने वाले प्रिंसिपल में इतिहास के गुरचरण सिंह, अर्थशास्त्र के संत सुरिंदर पाल, एमपीएड के जसविंदर सिंह, केमिस्ट्री विभाग की सविता रानी शर्मा, जूलोजी विभाग के विजय कुमार सिंह, फाइन आर्ट्स के सतनाम सिंह, कामर्स के ओम प्रकाश, फिजिकल एजुकेशन की शरनजीत कौर, अंग्रेजी के सुरिंदरपाल सिंह, बाटनी विभाग की मंजू साहनी, संस्कृत के परवीन शर्मा, बायोलाजी विभाग की जसविंदर कौर, फिजिक्स की हरपाल कौर, राजनीति विज्ञान की ज्योति प्रकाश, कामर्स के योगेश, बाटनी विभाग की मनजीत कौर और अंग्रेजी विषय के राजकुमार का नाम शामिल है।