हरियाणा सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद 1575 बच्चे स्कूल नहीं जा रहे हैं। इन बच्चों को स्कूल लाने के लिए शिक्षा विभाग द्वारा उठाए कदमों की हरियाणा सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट मांगी है। साथ ही ये भी निर्देश दिया है कि ये रिपोर्ट बाल अधिकार संरक्षण आयोग के साथ भी साझा करें, ताकि दोनों स्तर पर आंकड़ों का मिलान हो सके।
यह निर्देश प्रदेश के मुख्य सचिव संजीव कौशल ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को दिया है। वह शुक्रवार को यहां 'आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रेन' (ओओएससी) के संबंध में बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में श्रम, शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।
संजीव कौशल ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को आरटीई अधिनियम, 2009 की धारा 12 (1) (सी) के प्रावधानों को लागू करने के लिए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) की एसओपी के कार्यान्वयन के संबंध में वर्तमान स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। साथ ही स्कूल न जाने वाले बच्चों की जिलेवार वर्तमान स्थिति को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के बालस्वराज पोर्टल पर 28 जनवरी, 2023 तक अपलोड करने का निर्देश दिया।
इसके अलावा, संबंधित विभाग भी निजी स्कूलों में नामांकित बच्चों, जिन्हें आरटीई अधिनियम की धारा 12 (1) (सी) के तहत लाभ नहीं मिल रहा है और सरकारी स्कूलों में नामांकित बच्चों के बारे में स्टेटस रिपोर्ट अपलोड करने को कहा। राज्य में खुले शेल्टर की संख्या की वर्तमान स्थिति, संस्थागत देखभाल में रखे गए और केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं से जुड़े बच्चों की जानकारी भी मांगी है। बैठक में स्कूल शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव महावीर सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक मोनिका मलिक समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
ये बच्चे नहीं पा रहे स्कूल
बैठक में बताया गया कि हरियाणा में स्कूल न जाने वाले 1575 बच्चों की पहचान की गई है। इनमें से 787 को राज्य के विभिन्न स्कूलों में नामांकित किया गया है, जबकि दस्तावेज तैयार करने की प्रक्रिया और बाकी बच्चों को राज्य सरकार की योजनाओं से जोड़ने का काम चल रहा है। इन बच्चों में दिव्यांग, घर से पढ़ाई करने वाले बच्चे, चाइल्ड लेबर, अनमैप्ड मदरसों और प्रवासी बच्चे और ऐसे बच्चे, जिन्होंने कोरोना महामारी के दौरान दोनों या एकल माता-पिता को खो दिया है।