जब-जब नारियों पर संकट आया, तो धर्म रक्षा को आगे रहा: महंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी
- सेक्टर-11 में पिछले छह दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान यज्ञ
अमर उजाला ब्यूरो
पंचकूला। तपोनिष्ठ 108 महंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी महाराज ने कहा है कि जहां स्वच्छता होती है, वहीं भगवान का वास होता है। जब-जब नारियों पर संकट आया है धर्म उनकी रक्षा को आगे रहा है। वैदिक काल से लेकर आज तक नारियों की अस्मिता की रक्षा में धर्म का योगदान सबसे ऊपर है। आज जो स्थितियां हैं हमें फिर से संकल्प लेना होगा कि हम धर्म गुरुओं को आगे आकर समाज में सकारात्मक योगदान देना होगा।
संपूर्णानंद ने कहा कि वैदिक काल से लेकर आधुनिक काल तक जब-जब समाज में संकट आया है नारियों ने रक्षा की है। हम नारियों के सम्मान को उसी दौर में ले जाने का संकल्प लें। आपके मृत्यु का कारक और कारण कई हो सकते हैं, लेकिन आपके जन्म का कारण सिर्फ नारी की कोख ही हो सकती है। इस कोख का सम्मान करने वाला ही सर्वश्रेष्ठ मनुष्य है। हमें सिर्फ मनुष्य नहीं बनना है सर्वश्रेष्ठ मनुष्य बनना है। नारी की रक्षा ही धर्म की रक्षा है।
ब्रह्मचारी शनिवार को सेक्टर-11 में पिछले छह दिनों से चल रही श्रीमद्भागवत गीता ज्ञान यज्ञ में बोल रहे थे। उन्होंने कथा वाचक भागवताचार्य स्वामी विश्वामित्रानंद गिरी को आशीर्वाद दिया। कथावाचक ने महंत संपूर्णानंद ब्रह्मचारी को स्मृति चिन्ह भेंट किया। भागवताचार्य स्वामी विश्वामित्रानंद गिरी ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा देवताओं को भी दुर्लभ है तभी परीक्षित की सभा में शुकदेव ने कथामृत के बदले में अमृत कलश नहीं लिया। ब्रह्मा ने सत्यलोक में तराजू बांधकर जब सब साधनों, व्रत, यज्ञ, ध्यान, तप, मूर्तिपूजा आदि को तोला तो सभी साधन तोल में हल्के पड़ गए और अपने महत्व के कारण भागवत ही सबसे भारी रहा। अपनी लीला समाप्त कर जब श्री भगवान निज धाम को जाने के लिए उद्यत हुए तो सभी भक्त गणों ने प्रार्थना कि हम आपके बिना कैसे रहेंगे तब श्री भगवान ने कहा कि वे श्रीमद्भागवत में समाए हैं। यह ग्रंथ शाश्वत उन्हीं का स्वरूप है।